Tuesday, October 2, 2007

और भारत हार गया.

आज भारत और ऑस्ट्रेलिया का क्रिकेट मैच था. बड़ी उत्सुकता थी कि धोनी के धुरंधरों का कमाल और भारतीय क्रिकेट के त्रिमूर्तियों (सचिन, सौरभ और द्रविड़) का अनुभव का कमाल रंग लायेगा. इसी भरोसे के साथ शर्मा जी,वर्मा जी और उनकी मंडली, कुल मिलाकर आधा दर्जन लोग, सभी सुबह- सुबह मेरे घर आ धमके. चलो अब आ ही गये तो भगा तो नहीं सकते. मन ही मन गुस्सा आ रहा था कि आज छुट्टी के दिन जरा आराम किया जायेगा और चुन्नू, मुन्नू और उनकी अम्मा की साथ समय बिताया जायेगा. पर दिखावटी हँसी के साथ उनका स्वागत किया.
हमने धर्मपत्नी से कहा कुछ चाय वगेरा बना दो. इसी बीच मैच शुरू हो गया. शर्मा जी धोनी ब्रिगेट की तारीफ करते नहीं थक रहे थे. पर उनका अंधक्रिकेट भक्ति हमें अछ्छी पसन्द नहीं आयी. हम कबाब में हड्डी बनते हुए बोल ही पड़े “ शर्मा जी बुरा ना माने पर धोनी ब्रिगेट की असली परीक्षा तो आज है. पिछली बार तो बारिश ने इज्जत बचा ली आज देखें क्या होता है.” शर्मा जी ने आँखें चड़ा कर हमें देखा और मैच देखने में मशगूल हो गये. मैच देखने से ज्यादा हम शर्मा जी की कामेंट्री सुन रहे थे. पहली पारी समाप्त होने तक ऑस्ट्रेलिया 307 का विशाल लक्ष्य भारत को दिया.
शर्मा जी की आवाज कुछ नरम पड़ने लगी. इसी बीच धर्मपत्नी चाय पकोड़े ली आयी. भारतीय पारी शुरू होने वाली थी. शर्मा जी बोले ‘आज का मैच तो देखने लायक होगा. कडा मुकाबला है. हम चुप रहे . उसका कारण ये था कि गौतम गंभीर (7) अगये अभी-अभी पेवेलियन गये थे. शर्मा जी की आवाज कुछ और नरम हुई पेर जोश वैसा ही था. नौवें ओवर में सचिन(16) भी चलते बने. पर हमारी उम्मीद कायम थी कि भारत जीत जायेगा. जल्द ही युवराज सिंह और उनके पीछे-पीछे उथप्पा भी चलते बने. अभी स्कोर मात्र 87 पर 4 था. इसी बीच वर्मा जी की पत्नी का फोन आ गया. वो हम सबसे विदा लेते हुए चरन जी को अपने साथ ये कहते हुए ले गये कि भारत की स्थिति तु चल में आता हूं जैसी है. मजाक में शर्मा जी बोले ‘ आप चलिये में आता हूं’
माहौल अब हँसी मज़ाक में बदल चुका था. पर जल्दी ही शर्मा जी की हँसी पर विराम छा गया क्योंकि द्रविड, पठान और भज्जी चलते बने. स्थिति गंभीर थी भारत की भी और शर्मा जी की भी. अब पवार को पिच में जमता देख हमारे शर्मा जी भी जम गये जो थोडी देर पहले तक जाने की बात कर रहे थे. 35 वें ओवर में पवार और 40 वें ओवर में ज़हीर खान को जाता देख अब शर्मा जी भी जाने की बात कहने लगे. हमने कहा ‘ धोनी तो अभी धो रहा है कुछ देर और रूक जाओ. पर शर्मा जी अब जाने लगे. वैसे भी उनकी मंडली धीरे-धीरे जा चुकी थी. हम भी चल दिये शर्मा जी को गेट तक छोड़ने. शर्मा निराश भाव से बार-बार कहाँ रहे थे कि भारत अब नहीं जीतेगा. सब जानते हुए भी मैंने आश्वस्त करते हुए कहा ‘ अरे अभी तो धोनी पिच पर है’
और अभी मैं शर्मा जी को छोड कमरे में पहुचा ही था कि धोनी के आउट होने की खबर सुनाई दी. और भारत (222) हार गया.

3 comments:

दीपक श्रीवास्तव said...

बहुत सही आपका चिठा जगत मे स्वागत है

Udan Tashtari said...

हद हुई आज तो..और उससे भी ज्यादा...आपका चिठ्ठा जगत में स्वागत होते देख हतप्रभ हूँ...मानो कि आज आये हो.. हा हा!! स्वागत है मित्र पुनः सबके साथ समारोह में.

Deepak Shrivastava said...

मैंने तो नए ब्लॉग की शुरुवात करने के लिए स्वागत की थी