Some amazing but realistic pictures...

>> Sunday, October 23, 2011


Some amazing but realistic pictures...

Just chill ...













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वो पूजा पूजा न रही

>> Friday, February 18, 2011



जिसको पूजा पूजा की तरह,
वो पूजा पूजा हो गयी ।
इसमें पूजा का दोष नहीं ,
हमारी पूजा मे ही कमीं रह गयी ।

जिसको पूजा अश्क बहा के,
वो पूजा अश्क धारा me पूजा हो गयी ।
वो पूजा पूजा न रही,
जो पूज के भी पूजी न गयी।

वो पूजा जिसे चाहा हमने,
वो पूजा पूजा न रही।
वो पूजा जिसे पूजा दिल से,
वो पूजा पूजा न रही।

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ममतामई माँ

>> Sunday, May 9, 2010

माँ
तुम अनमोल
अतुलनीय
सर्वोपरि
सर्वोच्च
तुझे याद करने के लिए
एक दिन क्या!!
एक जीवन कम है।
माँ
तुमने दिया जीवन
तुमने किया अर्पन जीवन
तुम्हारे लिए मेरा पूरा जीवन समर्पन
माँ
तू ममता का सागर
तूने दिखाया संसार
उठाया सारा भार
है मुझ पर तेरा उपकार
माँ
शब्द कम हैं तेरे वर्णन में
जीवन बीता जिस उपवन में
तेरे कर्ज में डूबा तन मन में
आभार है तेरा मेरे जीवन में


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कसाब.... फ़ाँसी... सिस्टम.... बेबसी....

भारतीय न्याय व्यवस्था में एक रिकॉर्ड .....

कसाब... एक आतंकी ...

सबूत जगजाहिर... मरने वाले तकरीबन 160... 600 गवाह...

सबकी मांग एक.... कसाब को फ़ाँसी...

एक साल में फैसला.... एक एहसास, एक विस्वास न्याय व्यवस्था पर....

चेहरे पर झलकती खुशी....

पर एक संशय... एक उदासी ...

उन चेहरों पर जो खो चुके अपनों को...

खो गये उनकी यादों में... याद आने लगा वो पल...

वो मंजर .... जो कभी गुजरा था उन आखों से...

पूछती हैं वो बेबस निगाहें... वो सुबह कब आयेगी!! ...

कब वो दिन कब आयेगा जब न्यायिक फैसला अपने अंजाम तक पहुँचेगा...

निगाहें डूब जाती हैं आंसुओं के सागर में..

दिल को तसल्ली देकर.... वो सुबह कभी तो आयेगी....

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यादें बस यादें रह जाती हैं

>> Sunday, May 2, 2010


वो स्कूल की सीड़ी पर प्यार भरी बातें,
आते जातों पर कमेंट की बरसातें,
वो स्लेबस की टेन्सन, वो इक्ज़ाम की रातें
वो कैंट्टीन की पार्टी, वो बर्थडे की लातें
वो रूठना मनाना, वो बंक वो मुलाकातें
वो लैब वो लाइब्रेरी,
वो सोना टैम्प्रेरी
वो मूवी वो म्युजिक
वो कार्ड के मैजिक
वो प्रपोज़ल की प्लानिंग में रात का गुजरना
हर एक को दोस्त की भाभी बताना
लैक्चर से ज्यादा उसको निहारना
फिर क्लास में पीछे की सीट में सोना
उसकी नज़र में शरीफ़ बनाया जाना
ना रहे वो दिन ना रही वो रातें
ना रही वो वो हँसी भरी मुलाकातें
रही अगर कुछ तो बस यादें

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धरती कहे पुकार के

>> Friday, April 30, 2010


*****कविता *****

धरती कहे पुकार के
अब तो सभलो भाई
धड़कनें मेरे दिल की
क्यूँ बढ़ाते हो भाई

जबसे भेजा बच्चा तुमने स्कूल
भेजे में भरते गये उसके ये फितूर
दोहन नहीं हुआ धरती का ढंग से
लूटो, खसोटो बचे आभूषण उसके तन से

आभूषण मेरे पेड़, पहले ही छीन डाले तुमने सारे
मेरे तन का खून, नदी नाले सारे
कर दिया पैदा इनमें अवरोध
फिर भी नहीं कोई अपराधबोध

लूटा खसोटा तन को मेरे
खून रूका तन का मेरे
मन हो उठा बेचैन, उठा गुबार मन का मेरे
बन ज्वालामुखी अखियन तेरे

जब तक सताएगा, तड़पाएगा मुझे
नहीं मिलेगा चैन, आराम तुझे
मिलते रहेंगे नित नये झटके तुझे
अब तो सभल जा और समझ जा मुझे

मॉ तो होती है सब लुटाने वाली
पर क्यूं लगी तुझे लूटने की बिमारी
क्यूं करता यूं तू मारामारी
अब भी सभल जा वक्त रहते,बहुत बुरी है तेरी ये बिमारी

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उफ उफ गरमी, हाय हाय गरमी

>> Thursday, April 29, 2010



आया मौसम गरमी का,
आया मौसम नरमी का।
गये कपड़े गरमी वाले,
आये कपड़े गरमी वाले॥

गरमी आते खुल जाते पंखे,
ए.सी, कूलर और हाथ के पंखे।
जब आंख मिचौली करती बिजली,
तब इंवर्टर से मिलती बिजली॥

लू से बचते लू को खाते,
ना जाने कितने लोग।
बढ़ती गरमी के चक्कर में,
चक्कर खाकर गिरते लोग॥

गरमी को दूर भगाने के,
नित नये साधन आते॥
कोल्ड्रिंक, लस्सी, सत्तू, नीबू-पानी,
और भी ना जाने कितने साधन बन जाते॥

गरमी नित नये खेल दिखाती,
अच्छे अच्छों को नाच नचाती॥
सड़क, गली गलियारे सारे,
लगते सब वीरान बंजारे॥

गरमी में सब ढ़ूढ़ते छॉव,
पर अब ना रहे पेड़, ना रहे गॉव
ना चिड़िया का चहकना , ना कौवे की कॉव-कॉव,
ना रहे दादी के किस्से, ना रही पीपल की छॉव॥

नदियां नाले सूखे सारे,
पानी को तरसते सारे।
पानी मिले न मिले,
पर पिज्जा कोक पर पलते सारे॥

गरमी में सब ढ़ूढ़ते नरमी,
जाते पहाड़ ढ़ूढ़ने नरमी॥
पर अब पहाड़ भी ना रहे वो पहाड़,
अपना अस्तित्व खुद ढ़ूढ़ते पहाड़॥

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