Thursday, January 1, 2009

हैप्पी न्यू ईयर आज अंग्रेजी में

*****हैप्पी न्यू ईयर आज अंग्रेजी में*****

साल का पहला दिन, पहली सुबह , बधाईया , एस एम एस की लाइन , फोन पर बधाईयों का सिलसिला। सभी चिट्ठे खुशियों और बधाईयों से भरपूर । पर हैप्पी न्यू ईयर है क्या बताते हैं आज वो भी अंग्रेजी में ।

Wish You and Your Family a Very Very "Happy New Year 2009"

Meaning of Happy New Year in my views:

H ours of happy times with friends and family
A bundant time for relaxation
P rosperity
P lenty of love when you need it the most
Y outhful excitement at lifes simple pleasures
N ights of restful slumber (you know - don't worry be happy)
E verything you need
W ishing you love and light
Y ears and years of good health
E njoyment and mirth
A angels to watch over you
R embrances of a happy years!!!


Always do your best and one day definately you will get your destination

My Best Wishes to you to Achieve Your Goal/Target in this new Year २००९




Sunday, December 28, 2008

कल की माथापच्ची राज भाटिया जी के नाम

*****कल की माथापच्ची राज भाटिया जी के नाम*****

कल की माथापच्ची पूरी तरह से राज भाटिय़ा जी के ना120px-Golden_Dropम रही. जो एकमात्र विजेता रहे. पहले राज जी भी भटक गये थे.

शुभम आर्य जी जी श्रीफल बताते है.

विनय आडू बतातेहै

"अर्श" जी गुलेर कहpp1ते हैं.

राज भाटिय़ा जी पहले Damson की सम्भावना व्यक्त करते हैं.
इसका सही उत्तर प्लुम है जिसे आलूबुखारा भी कहते हैं. चाइना मूल का माने जाने वाला प्लुम दक्षिण अफ्रिका, एशिया, चिली और यूरोप में आसानी से पाया जाता है.
प्लुम Plums अगस्त, सितम्बर के महिनों में खाने के लिए तैयार होता है. साधारणतppया प्लुम 6-15 मी. ऊँचे पेड़ों में 4-6 सेमी. लम्बी पत्तियों के साथ 3-5 के गुच्छों में 3-6 सेमी. लम्बा होता है. प्लुम लाल, बैंगनी, पीला और हरे रंग का कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, आइरन विटामिन 300px-Plum_cakeसी आदि से भरपूर होता है. इसकी लगभग 200 किस्में होती हैं जिनमें से 140 किस्मों से प्लुम अमेरिका में बेची जाती हैं. यहाँ यह ड्राई फ्रूट्स के रूप में पसन्द किया जाता है.
प्लुम से अचार, जैम, आइसक्रीम, पुडिंग, चोकलेट बनाई जाती है.

 

Saturday, December 27, 2008

चित्र पहेली- माथापच्ची शुरू!!!

*****चित्र पहेली- माथापच्ची शुरू!!!*****

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इस फल का क्या नाम है.?

एकदम आसान पहेली है. उत्तर कल को यहीं पर मिलेगा.

चलिए दिमाग लड़ाईये भी !!..

Monday, December 1, 2008

नो केस, नो चार्जशीट. हैंग टिल डैथ.

*****नो केस, नो चार्जशीट.  हैंग टिल डैथ.*****

मुंबई पर हमला करने वाले आतंकियों में से जिंदा पकड़ा गया मोहम्मद अजमल उर्फ मोहम्मद अमीर कसब अब खाना खाने से इनकार कर रहा है. वह पुलिस से अब खुद को मार दिए जाने के untitled लिए गिड़गिड़ा रहा है.  पुलिस उससे पूछताछ करने की कोशिश कर रही है.

क्यूँ नहीं इस समय पर ऐसे आतंकी का नारको टैस्ट और लाई डिटेक्टर टैस्ट  किया जाता. जबकि मांलेगाँव धमाके में पकड़े गये आरोपियों का और आरूषि हत्याकांड में पकड़े गये आरोपी कृष्णा का नारको टैस्ट और लाई डिटेक्टर टैस्ट बिना न्यायिक अनुमति के किया जाता है.

इस तरह के आपराधिक मामले के आरोपीयों, जो सीधे पकड़े गये और जिन पर आरोप सिद्ध करने जैसी बाध्यता नहीं होनी चाहिए, को त्वरित कार्यवाही करते हुए बिना किसी संकोच के सजाए मौत दे देनी चाहिए. नो केस, नो चार्जशीट.  हैंग टिल डैथ. कही ऐसा ना हो कि ये भी अफ़ज़ल गुरू जैसा केस बन कर रह जाये!!!

ऐसे संवेदनशील बिषय पर हमारे राजनेता अपनी राजनितिक रोटियाँ सेकने का काम करते आये है. आरोप-प्रत्यारोप, बयानबाजी करना तो पुरानी बात हो गयी है. जब सांसदों की सेलरी बड़ाने की बात आती है तो सब एक साथ खड़े नज़र आते हैं. राष्ट्रीय एकता की बात सभी करते हैं. पर जब कठोर कानून बनाने जैसी बात आती है तो बहस शुरू हो जाती है. जब आपको पता है कि पकड़ा गया व्यक्ति आतंकवादी ही है तो वहाँ बहस करने की जरूरत क्यूँ पड़ती है? क्यूँ सज़ा पाने के बाद भी अफ़ज़ल गुरु आज जिन्दा है. और भी ना जाने कितने मामले हैं जो हम भूल जाते हैं.  न्यायिक व्यवस्था को बदलना होगा ताकि मामले सालों तक ना खिंचे और अपराधी का राम नाम सत्य हो जाये!!

Friday, November 28, 2008

कहाँ गये राज ठाकरे अब!!!

*****कहाँ गये राज ठाकरे अब!!!*****

देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई पर आतंकियों का अब तक का सबसे बड़ा हमला हुआ. ताज और ओबेरॉय सहित 10 से ज्यादा जगहों को निशाना बनाया गया. जिसमें 100 से ज्यादा लोग अपनी जान गवां बैठे. इसी आतंकी हमले से लोहा लेते हुए ए.टी.एस. प्रमुख हेमंत करकरे  सहित 14 जाबांज सिपाही शहीद हो गये. ऐसे ज़ांबाज़ सिपाहियों को सलाम.mt

इस हमले से मुम्बई का जनजीवन ठप सा हो गया. स्कूल, कॉलेज, ऑफिस सभी बन्द कर दिये गये. सेबी ने शेयर मार्केट भी बन्द कर दिया. कभी ना सोने और रूकने वाली मुम्बई ठहर गई. विदेशी सैलानियों पर डर और खौफ आसनी से देखा जा सकता था. इंगलैंड की क्रिकेट टीम बीच में ही वापस जाने लगी.

इस आतंकी हमले के बाद नेताओं के बयान आने स्वभाविक थे. कई सम्माननीय नेताओं ने मुम्बई का दौरा किया. पर जिस नेता की टिप्पणी आने का इंतजार था वो पता नहीं कहाँ गायब हो गया. कुछ महिनों पहले मुम्बई और देश को भाषा और क्षेत्र के नाम पर बाँटने वाले और मुम्बई में उत्तर भारतीयों के खिलाफ आग उगलने वाले राज ठाकरे इस समय कहाँ गये.  कहाँ गये मनसे के कार्यकर्ता. कोई प्रतिक्रिया नहीं आई उनकी ओर से जो मुम्बई को अपनी जागीर बताते थे. जबकि राज ठाकरे जो जेड सुरक्षा दी गई है.ये बड़ी विडम्बना की बात है कि देश को बाँटने की बात करने वाले को इतना बडा सुरक्षा घेरा दिया गया है.

आखिर क्यूँ और कैसे भारत में आतंकी बड़ी आसानी से प्रवेश कर जाते हैं?. मेरा मानना है कि राजनीति और भ्रस्टाचार इसके लिए दोषी है. अगर आप यहाँ कोई गलत काम करते हैं और गलती से पकड़े जाते हैं तो आप लेन-देन के माध्यम से आसानी से बच सकते हैं.  

राजनीति और विशेषकर वोट की राजनीति ने कड़े फैसले लेने से हमेशा रोका है. संसद पर हमले के दोषी पाये गये अफज़ल गुरु को फाँसी की सज़ा दिये जाने के बाद भी आज वो जिन्दा है. आखिर क्यूँ?? क्युँ नहीं भारत में अमेरिका की तरह कडे फैसले लेने का साहस है? क्यूँ भारत में देश की सुरक्षा के नाम पर खिलवाड़ होता है जबकि अमेरिका में सुरक्षा के लिए भारत के रक्षा मंत्री के कपड़े उतारने से भी परहेज नहीं किया जाता है. क्यूँ भारत में वोट की राजनीति खेली जाती है जबकि अमेरिका विरोध के बाद भी इराक के राष्ट्रपति को  फ़ाँसी दे दी जाती है.? 

Sunday, November 16, 2008

हमारा हाईटैक समाज

***** हमारा हाईटैक समाज*****

हम और हमारा समाज आज हाईटैक हो गया है. यह बात हर जगह देखी जा सकती है.

नेता हाईटैक हो गये हैं- 2 घंटे में गैर जमानती वारंट में जमानत मिल जाती है. untitled

महंगाई हाईटैक हो गई है- महंगाई दर कम होने पर भी महंगाई कम नहीं होती है.

आतंकवाद हाईटैक हो गया है- आतंकवाद अब हिन्दू और मुस्लिम हो गया है. हथियार तो पहले से ही थे.

टेकनोलॉजी हाईटैक हो गई है- अब प्रेमी अपनी प्रेमिका से चॉद को तोड़ लाने की नहीं चॉद पर रहने की बात करते हैं.

बच्चे हाईटैक हो गये हैं- बिना मोबाईल के स्कूल नहीं जाते हैं.

शिक्षा अब हाईटैक है- बिना कम्प्युटर के पढ़ाई नहीं हो पाती है.

चिकित्सा हाईटैक है- डॉक्टर विडिओ कांफ्रेंसिंग में चिकित्सा दे रहे हैं.

तनाव हाईटैक हो गया है- अब लोग तनाव में सीधे गोली-बारूद से बात करते हैं या फिर अपने आप को इनके हवाले कर देते हैं.

भिखारी भी हाईटैक हि गये हैं- जेब में मोबाईल रखते हैं और में 5-10 रूपये से कम नहीं लेते हैं.

भीख मांगने का तरीका हाईटैक हो गया है- अब भीख भी पर्चे बाटकर मांगी जाती है.

चुनाव प्रचार हाईटैक हो गये है- अब एस.एम.एस. और ई-मेल के माध्यम से जनता तक पहुँचा जा रहा है. 

आज के टेक्नोयुग में हमारी जीवन शैली बदल गई है. जीवन को सोचने, समझने, देखने, और जीने का अन्दाज़ बदल गया है. इन सबके बीच हम अपने भोलेपन को खो रहे हैं. प्रतिस्पर्धा की गति बड़ी है. स्वार्थ भावना बड़ी है. तनाव बड़ा है. अशांति बड़ी है. जीवन को पाने के लिए कहीं हम जीवन को खो रहे हैं.

Saturday, November 15, 2008

शेर और चीते की घोड़े की सवारी

*****शेर और चीते की घोड़े की सवारी*****

 

सुनने में कुछ अटपटा लगता है ना शेर और चीते की घोड़े की सवारी. पर ये है सही बात. अब हम क्या बोलें आप खुद ही देख लें. 

 

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और अंत में ये भी :)

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