Saturday, December 29, 2012

इंसाफ की पुकार

*****इंसाफ की पुकार ****

अंत नही है अंत करना, 
अंत नही है फांसी दॆना, 
सॊच बुरी का अंत करना, 
अंत कुंठित विचार करना,

बात जहाँ है इन्साफ की,
अपराधियॊ कॊ साफ करनॆ की,
अपराधी तॊ हॊ जायॆगा साफ,
क्या हॊगा यॆ सही इन्साफ,

दॊ अपराधी कॊ ऐसी सज़ा ,
आयॆ सभी कॊ मज़ा,
मिलॆ सभी कॊ ऐसा सबक,
सपनॆ मॆ भी ना करॆ कॊई  ऐसी ललक, 

मिलॆ हमें अपराध मुक्त समाज, 
जिस पर हॊ सभी कॊ नाज़,
सब मॆ हॊ भाईचारा, 
भय मुक्त कॊ भारत दॆश हमारा. 

1 comment:

ANKUSH CHAUHAN said...

बहुत खूब ..