Saturday, September 6, 2008

आपदा और दलाल

*****आपदा और दलाल*****



साधन जितने
दलाल भी उतने
पहुँचे नहीं राशन वहाँ
जरूरत हो इसकी जहाँ
कैसे हो समस्या का समाधान ?
सब जानकर भी हैं अनजान
क्या हो जब हों हम तुम हैरान!!
ये है मेरा प्यारा हिन्दुस्तान
कुछ समझे मेरी जान!!
- कामोद

9 comments:

संगीता पुरी said...

सबकुछ समझ में आ गया। बहुत अच्छा।

राज भाटिय़ा said...

बिलकुल सही फ़रमाया आप ने,
धन्यवाद

Udan Tashtari said...

कुछ तो समझ में आ ही गया!!

बेहतरीन!!


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निवेदन

आप लिखते हैं, अपने ब्लॉग पर छापते हैं. आप चाहते हैं लोग आपको पढ़ें और आपको बतायें कि उनकी प्रतिक्रिया क्या है.

ऐसा ही सब चाहते हैं.

कृप्या दूसरों को पढ़ने और टिप्पणी कर अपनी प्रतिक्रिया देने में संकोच न करें.

हिन्दी चिट्ठाकारी को सुदृण बनाने एवं उसके प्रसार-प्रचार के लिए यह कदम अति महत्वपूर्ण है, इसमें अपना भरसक योगदान करें.

-समीर लाल
-उड़न तश्तरी

Dr. Amar Jyoti said...

जी हां। 'मेरा भारत महान'

योगेन्द्र मौदगिल said...

भई वाह .....अच्छा कहा... बधाई..

Parul said...

bahut kuch sach!!!!

bavaal said...

Bilkul sahi kaha aapne.

ताऊ रामपुरिया said...

सब कुछ समझ गए ! धन्यवाद !

sab kuch hanny- hanny said...

सब जानकर भी हैं अनजान
क्या हो जब हों हम तुम हैरान!!
ये है मेरा प्यारा हिन्दुस्तान
कुछ समझे मेरी जान!!
sach kaha aisa hi ho gaya hai desh