Monday, June 30, 2008

केक्टस (नागफनी) - कविता


लोग मुझे हैं दुत्कारते
दाना-पानी नहीं खिलाते,
घर में सबसे दूर बैठाते
काँटों का राजा मुझे बतलाते।

पर मैं करता काम भलाई
रखता उनसे दूर बुराई,
फिर क्यूँ मुझको दुत्कार लगाई
ये बात भैया समझ न आई।

सताती गरमी
रूलाता पानी,
बातें करता हूँ खुद से
याद आती अपनी कहानी।

नाम राशि एक जीव है मेरा
नहीं हमारा एक बसेरा,
नाग वो तो फनी है मेरा।

कल की चित्र पहेली का उत्तर है नागफनी (cactus)

2 comments:

advocate rashmi saurana said...

bhut sundar likha hai. badhai ho. aapne aj ye kavita likhakar vakai bhut accha kiya. pahali bar kektas ki kavita padi. sachmuch bhut badhiya.
accha to ye phool kektas ka hai.

Udan Tashtari said...

जीवन भर न हल कर पाते आपकी पहेली. :)