Saturday, August 15, 2009

स्वतंत्रता दिवस- स्वतंत्रता के बदलते मायने और इसका स्वरूप

*****स्वतंत्रता दिवस- स्वतंत्रता के बदलते मायने और इसका स्वरूप*****

स्वतंत्रता मतलब आज़ादी..... आज़ादी किसी कैद से, किसी पिंजरे से.. 62 साल पहले हम भारतीय भी आज़ाद हुए थे विदेशी राजनीति और विदेशी वर्चस्व से... नयी उमंग नये सपने.... अपनेपन का अहसास...

आज़ादी से पहले संधर्ष एक गुलामी से था.... विदेशी वर्चस्व और तानाशाही से था. बढ़ते अत्याचार और दोहरी राजनीति के विरूद्ध था... संधर्ष अपने हक़ और अधिकार के लिए था जो अपने होते हुए भी अपने नहीं थे... दाता होते हुए भी याचक बन गये थे...

हमारी संस्कृति 'अतिथि देवो भव:' जिस पर हमें कभी गर्व था और आज भी है हमारे लिए अभिशाप बन गई... हम लुटते रहे पर उफ़ तक नहीं की.... सोने की चिड़िया से पिंज़रे की चिड़िया बन गये...

पानी सर से ऊपर गया लुटने का अहसास हुआ पैर से धरती और सर से आकाश गया फिर आजादी का संधर्ष हुआ कुछ लड़े कुछ मिट गये गरम, नरम और उग्र दल बन गये.

गाँधी, नेहरू, सुभाष, आदि के संधर्ष और चन्द्रशेखर, भगत सिंह, राजगुरू और बिसमिल आदि के बलिदान से आज़ादी मिली.. आज़ादी मिली तो राजनीति शुरू हो गई.. पाकिस्तान बन गया... देश में अन्दरूनी राजनीति शुरू हो गई.. सता संधर्ष और राजनीति की... सरदार पटेल ने अपना राजनितिक बुद्धि-कौशलता से देश को एक डोर में पिरोया..

आज भी हम स्वतंत्र हैं ... गर्व है हमें अपनी आजादी पर ... पर गर्व नहीं है अपने राजनेताओं पर.. हर कोई नेता बनने को तैयार है.. बाहुबली, डाकू-लुटेरे, सजायाफ़ता, तथाकथित सामजिक ठेकेदार और छुटभैये.. सभी राजनीति से अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं...

हम स्वतंत्र है... इसलिए दंगे-तोड़फोड़ करना हमारा अधिकार है .. अभिव्यक्ति का अधिकार.. कुछ भी हो तो आग लगाना, जाम लगाना, सरकारी सम्पत्ति तोड़ना... अपहरण करना, हत्या-बलात्कार करना, लूट मारपीट करना तथाकथित लोगों का अधिकार बन गया है...

हम स्वतंत्र है... इसलिए जो चाहते हैं कर सकते हैं.. चाहे भूत-प्रेत, सेक्स और व्यक्तिगत मुद्दों के नाम पर टी. आर. पी. हो या फिल्म के नाम पर कुछ भी परोस देना... सब चलता है...

हम स्वतंत्र हैं इसलिए आज़ादी और समानता हमारा अधिकार है... अधिकार मांगने के लिए प्रदर्शन... समलैंगिकता जैसे संवेदनशील बिषय पर बदलते विचार और उस पर कानून की मुहर...

स्वतंत्रता का भरपूर उपयोग वो भी करते हैं जो करप्शन कर रहे हैं... नकली को असली बनाते हैं... वो लूटते है हम लुटते हैं ... जानते हैं फिर भी पिटते हैं... लुटते हैं फिर भी डरते हैं... खुश रहते हैं चलो आज तो हम बच गये....


इतने सालों बाद स्वतंत्रता के सवरूप बदल गया है. स्वतंत्र हैं फिर भी स्वतंत्रता की तलाश है...

अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं । सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं ॥

Friday, August 14, 2009

बोलो बांके बिहारी लाल की जै

***** बोलो बांके बिहारी लाल की जै*****

आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी है. इस अवसर पर अधिकांश लोग व्रत एवं पूजा पाठ करते हैं. मन्दिरों में कीर्तन-भजन होता है. भक्तजन अपनी श्रद्धा का परिचय देते हुए कई घण्टे पंक्तिबद्ध दर्शनार्थ रहते हैं. वृन्दावन, मथुरा और गोकुल में आज के दिन श्रद्धा का सैलाब उमड़ता है. 'बोलो बांके बिहारी लाल की जै' .

मथुरावासी श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में एक दिन पहले से ही नाचते गाते हैं. जहाँ कृष्ण का जन्म हुआ था. रात 12 बजे अष्टमी को जन्म होने के बाद वासुदेव सुरक्षा कारणों से कृष्ण को गोकुल छोड़ आते हैं जहाँ पहुँचते- पहुँचते सुबह के चार बज जाते है. हिन्दु मान्यता के अनुसार 4 बजे बाद नया दिन शुरू हो जाता है. यही कारण है कि श्रीकृष्ण जन्मोत्सव हर साल दो बार मनाया जाता है. 'बोलो जय श्रीकृष्ण' .

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव राजकीय और राष्ट्रीय रूप में 'वैष्णव मत ' के अनुसार मनाई जाती है क्योंकि गोकुल निवासी और नन्द जी वैष्णव थे. इस अवसर पर वृन्दावन के भक्त कृष्ण, राधा और गोपियों के खेल करते हैं और झांकियां निकालते हैं . राधा और कृष्ण का प्रेमानुराग इतना अधिक और प्रसिद्ध हुआ कि आज भी राधा-कृष्ण आज भी अलग नहीं हो पाये. 'बोलो राधे-कृष्ण' . वृन्दावन में आज बड़े-बड़े बाबाओं और महात्माओं के आश्रम जगह-जगह देखे जा सकते हैं.

इस अवसर में व्रती भक्त फलाहार करते हैं जिसमें अन्न नहीं खाते हैं. कुछ नमक नहीं खाते तो कुछ सेंधा नमक का उपयोग करते हैं. आलू, साबूदाना, कोटू का आटा आदि से विभिन्न पकवान बनाये जाते हैं. मीठे आहार के रूप में सोंठ, अजवाईन, हल्दी, सूखा अनारियल, चीनी, खाने वाला गोंद, सूखे मेवे आदि मिलाकर प्रसाद 'पजीरी' बनाया जाता है. जिसे सूखे रूप में और मिठाई की तरह बनाकर खाया जाता हैं.

सभी भक्तजनों को जय जन्माष्टमी की शुभकामनाएं. 'बोलो बांके बिहारी लाल की जै'.

Friday, August 7, 2009

ऐ लो जी सनम हम आ गये

*****ऐ लो जी सनम हम आ गये *****

करीब छ: महिने से चाहकर भी अपनी ब्लॉगिंग की गाड़ी को धक्का नहीं लगा पा रहा था। कारण कुछ निजी थे॥ सार्वजनिक करने पर सच का सामना जैसी स्थिति हो सकती है । चलिये अब आये हैं तो कुछ लिखना पड़ेगा ही।

इन दिनों मेरे देश में

मन्दी ने अपना असर दिखाया.
महंगाई ने अपना कहर ढाया.
अच्छे अच्छों को नाँच नचाया.
चीनी चढी ऊपर आलू प्याज तक ने रूलाया।

माया ने अपना पुतला लगाया
गरीबों को ठेंगा दिखाया।
कहीं सूखे ने अपना असर दिखाया
वहीं बाढ़ ने कहर ढ़ाया

रेल में बैठ ममता आई
लालू जी की सामत आई.
नये नये सपने लाई
लालू रेल की पोल खुलाई।

देखो कसाब की खुली कलाई
खुद ही अपनी करतूत बताई
मुंबई हमले वालों की भी हुई सुनवाई
साजिश करने वालों को हुई फ़ाँसी की सुनाई.