

*****आवारा पागल इंसान *****
आतंकवाद जब तब दस्तक देता रहता है. स्थानीय लोग कभी धर्म तो कभी जाति के नाम पर आतंक फैलाते हैं. मरने वाले अक्सर उसी जाति या धर्म के होते है जो आतंक करते हैं. कुछ समय पहले गुजरात मुम्बई में हुए विस्फोटों में मानव बम भी अपना काम कर गये.
उन्ही सब से प्रेरित हैं ये कुछ शब्द .
आवारा पागल इंसान जो करता है दूसरों को परेशान जिसका न कोई दीन-ईमान आवारा पागल इंसान
जो करता है समय को बरबाद हो न सकेगा वो कभी आबाद है न उसे वक़्त की पहचान आवारा पागल इंसान
जो करता है अपनों को बरबाद करता है दूसरों को आबाद है ऐसा ये पागल इंसान आवारा पागल इंसान
जो आता है दूसरों के बहकावे में तब न रहता है अपने आपे में है उसकी ज़िंदगी शमशान आवारा पागल इंसान
जो रहता है सदा शक के घेरे में कभी पुलिस तो कभी वकील के झमेले में कभी फुटपात तो कभी जेल है उसका मकान आवारा पागल इंसान
-कामोद
कल की चित्र पहेली में अलग-अलग तरह के उत्तर मिले. पर सबसे पहले पकड़ा अनामी डीसीपी ने. पर समीर जी, राज जी और अरविन्द जी सही उत्तर देने में अंतत: सफल रहे. समीर जी तो खुशी में जिन्दाबाद- जिन्दाबाद के नारे भी लगा बैठे. :)
चित्र पहेली में जो पौधा दिखाया गया था उसे भारत में सामान्यतया बिच्छू घास या बिच्छू बूटी के नाम से जाना जाता है और यह बहुतायत से पहाड़ी क्षेत्रों में पाया जाता है. इसे Stinging Nettle नाम से भी जाना जाता है. इसका बैज्ञानिक नाम Urtica dioica है यह यूरोप, एशिया, उत्तरी अमेरीका और उत्तरी अफ्रीका में पाया जाता है.
बिच्छू घास पूरी तरह कांटों से भरा होता है जिनमें acetylcholine, histamine, 5-HT और formic acid का मिश्रण होता है जिससे इसको छूने मात्र से असहनीय जलन और खुजली महसूस होती है और दाने निकल आते हैं. इसलिए इसे खुजली वाला पौधा के नाम से भी पहचाना जाता है.
इसका प्रयोग दवाई के रूप में किया जाता है. यह घुटनों और जोड़ों के दर्द में असर अचूक माना जाता है. स्थानीय लोग इसे सीधे दर्द वाले स्थान पर लगाते हैं. यह अर्थेराइटिस (arthritis) में इसका प्रयोग किया जाता है. इसे हर्बल दवाईयों के निर्माण में प्रयुक्त किया जाता है.
अमेरिका में तो इसकी खेती भी की जाती है. वहाँ होने वा
ली बिच्छू घास कुछ लाल की होती है और पत्ते गोलाई लिये होते हैं. जिसे उत्तराखण्ड में अल्द के नाम से जाना जाता है. बिच्छू घास के कोमल पत्तों का सूप और सब्जी भी बनाई जाती है. जिसे हर्बल डिश कहते हैं. यह गरम तासीर की होती है और इसका स्वाद कुछ-कुछ पालक की तरह होता है. इसमें बिटामिन A,B,D , आइरन, कैल्सियम और मैगनीज़ प्रचुर मात्रा में होता है.
उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ शहर में होने वाले बग्वाल मेले के प्रसिद्ध पत्थर युद्ध में घायल लोगों का इलाज किसी ह्स्पताल में न कराकर मन्दिर के पीछे होने वाले बिच्छू घास से ही की जाती है. उत्तराखण्ड के अल्मोड़ा शहर में एक एनजीओ ने पास के गांवों से लगभग 700 महिलाओं को काम पर लगा रखा है जो ऊन और बिच्छू घास से मेरीनो सब्जी डाई का उपयोग करते हुए खूबसूरत शॉल बनाती हैं. जिसे पंचुचूली शॉल के नाम से जाना जाता है.
भारत में यह जंगली पौधे के रूप में अपने आप पैदा हो जाता है. इसका प्रयोग स्थानीय लोग पशुओं के चारे के रूप में साधारणतया करते हैं. इसका प्रयोग दण्ड देने के लिए भी किया जाता है. बिच्छू घास को पाने में भिगाकर लगाने से दण्ड से अपराधी को दादी-नानी याद आने लगती है:) उत्तराखण्ड के कई इलाकों में शराबियों को सुधारने के के लिए बिच्छू धास का सहारा भी लिया.
शनिदेव के प्रकोप से बचने और पटाने के लिए भी बिच्छू धास का प्रयोग ज्योतिषी बताते हैं. नीलम,नीलिमा,नीलमणि,जामुनिया,नीला कटेला, आदि शनि के रत्न और उपरत्न हैं. अच्छा रत्न शनिवार को पुष्य नक्षत्र में धारण करना चाहिये. इन रत्नों मे किसी भी रत्न को धारण करते ही चालीस प्रतिशत तक फ़ायदा मिल जाता है. जो इन रत्नों का जुगाड़ ना कर सके वह बिच्छू बूटी की जड़ का प्रयोग कर सकता है.
बिच्छू बूटी की जड़ या शमी जिसे छोंकरा भी कहते है की जड शनिवार को पुष्य नक्षत्र में काले धागे में पुरुष और स्त्री दोनो ही दाहिने हाथ की भुजा में बान्धने से शनि के कुप्रभावों में कमी आना शुरु हो जाता है.
यह कहानी मुझे ई-मेल से मेरे मित्र ने भेजी. इसे में उसी तरह यहाँ पर प्रस्तुत कर रहा हूँ ताकि इसके भाव वही रहें.
A little boy wanted Rs.50 very badly and prayed for weeks, but nothing happened.
Finally he decided to write God a letter requesting the Rs.50. When the postal authorities received the letter addressed to God, INDIA, they decided to forward
it to the President of the India as a joke.
The President was so amused, that he instructed his secretary to send the little boy Rs.20.
The President thought this would appear to be a lot of money (Rs.50) to a little boy,
and he did not want to spoil the kid.
The little boy was delighted with Rs.20, and decided to write a thank you note to God,
which read:
"Dear God: Thank you very much for sending the money.
However, I noticed that you sent it through the
Rashtrapati Bhavan in New Delhi , and those donkeys deducted Rs.30 as tax ... "
बाल बहुत काम की चीज़ होती है और कभी परेशानी की भी. मैने इसे कुछ यूँ अनुभव किया..
बाल सिर में हो तो अदाकारी
बाल सिर में ना हो तो बिमारी
बाल आँख में जाये तो किरकिरी
बाल खाने में आ जाये तो उबकारी
बाल-बाल बचे जब बच आये कही से
बाल की खाल निकले जब खींचे कोई टांग
बाल श्रम बन जाये जब हो जाये काम
बाल विवाह बन जाये जब हो जाये शादी
बाल साहित्य बन जाये जब बन जाते किताब
बाल मिठाई बन जाये जब मिल जाये मीठा
बाल सखा अरू बाल क्रीड़ा बाल मन तरसाये
बाल बने बाल जब बाल-बाल मिल जाये.
पिछले दिनों ब्लॉग जगत में छींटाकशी, आरोप प्रत्यारोप, तू-तू मैं-मैं देखने को मिली. तूने मेरे ब्लॉग में टिप्पणी क्यूँ की!!. नहीं चाहिए मुझे किसी की सहानुभूति. $#@%&*+-! मैं किसी के लिए नहीं लिखता. वगैरा वगैरा...
ब्लॉग क्यूँ लिखते हैं?? क्या आधार है लिखने का जब पाठक ही न हों! खाली पीली टाईम खोटी करने से क्या फायदा.
जब आप लिखते हैं तो आलोचना, समालोचना के लिए सहज रूप से सकारात्मक मानसिकता के साथ तैयार रहना चाहिए. अगर मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा, तेरे बाप का वो क्या करती थी कहकर लट्ठ चलाने लगे तो ब्लॉगिंग का उद्देश्य समाप्त ही हो जायेगा.
ब्लॉग एक व्यक्तिगत डायरी है. एक दैनिक प्रवचन मंच. एक सहयोगपूर्ण स्थान. एक राजनैतिक सोपबॉक्स. एक ताज़ा समाचार आउटलेट. लिंकों का एक संग्रह. आपके अपने निजी विचार. दुनिया को दिए जाने वाली ज्ञापन. वो सब कुछ जो आप चाहते हैं.
आपका ब्लॉग वैसा ही है जैसा आप उसे चाहते हैं. सामान्य शब्दों में, ब्लॉग एक वेब साइट है, जहाँ आप नियमित तौर पर सामग्री लिखते हैं. नई सामग्री सबसे ऊपर दिखती है, ताकि आपके विजिटर पढ़ सकें कि नया क्या है. इसके बाद वे उस पर टिप्पणी कर सकते हैं या उसे लिंक कर सकते हैं या आपको ईमेल कर सकते हैं. या नहीं.
अब यह ब्लॉगर पर निर्भर करता है कि वो किसे पढ़ाये किसे नहीं. फ्री की चीज है ब्लॉगिंग तो ठेले जाओ कौन रोकता है. पर आ बैल मुझे मार का नारा क्यूँ लगाते हो.
बहुत से लोग बस अपने विचारों को व्यवस्थित करने के लिए ब्लॉग का प्रयोग करते हैं, जबकि दूसरे प्रभावकारी, पूरी दुनिया के हजारों लोगों पर अपनी छाप छोड़ते हैं. प्रोफेशनल और शौकिया पत्रकार ब्लॉगों का उपयोग नवीनतम समाचार प्रकाशित करने के लिए उपयोग करते हैं, जबकि व्यक्तिगत पत्रकार अपने अंदरूनी विचारों की अभिव्यक्ति के लिए.
यहीं से ब्लॉगियाते हुए बहुत से ब्लॉगर आज ब्लॉग रत्न बन गये. वैसे भी हीरे की कद्र जौहरी ही जानता है. जब तक सोना आग में तपेगा नहीं तब तक उसमें निखार कैसे आयेगा. टिप्पणियाँ और टिपियाने वाले ब्लॉगिंग के जौहरी ही होते है. अपन तो आग में कूदने के लिए तैयार बैठा है बस जौहरी की तलाश है. देखो कौन सा जौहरी आता है.
अगर ब्लॉगिंग करते-करते पोस्टिंग पेज़ से बोर हो गये हैं या ब्लॉगिंग में विण्डो लाइव राइटर जैसा अन्दाज़ चाहते हैं तो इसका मज़ा लूटिये ब्ळॉगर ब्लॉगर में ही. अभी तक जिस पोस्टिंग पेज़ का प्रयोग प्रयोग मैं कर रहा था वो कुछ इस तरह था. (चित्र)
पर ब्लॉगर ने पेश किया है ड्राफ़्ट में ब्लॉगर. जिसका पोस्टिंग पेज़ नई सुविधाओं के साथ कुछ इस तरह का नज़र आता है. (चित्र)
इसमें चित्र कम समय में उसी विण्डो में अपलोड हो जाता है.
यह कट, कॉपी और पेस्ट करने वालों की सहायता नहीं करता है. कई ऐसे ब्लॉगर्स के लिए यह सुविधाजनक नहीं भी हो सकता. इसकी सेटिंग्स में जाकर ब्लॉग उपकरण की सहायता से ब्लॉग का आयात-निर्यात भी कर सकते हैं. और भी बहुत कुछ हैं इसमें.
तो शुरू हो जाईये और मज़ा लूटिये ड्राफ़्ट में ब्लॉगर का ...