Monday, June 30, 2008

केक्टस (नागफनी) - कविता


लोग मुझे हैं दुत्कारते
दाना-पानी नहीं खिलाते,
घर में सबसे दूर बैठाते
काँटों का राजा मुझे बतलाते।

पर मैं करता काम भलाई
रखता उनसे दूर बुराई,
फिर क्यूँ मुझको दुत्कार लगाई
ये बात भैया समझ न आई।

सताती गरमी
रूलाता पानी,
बातें करता हूँ खुद से
याद आती अपनी कहानी।

नाम राशि एक जीव है मेरा
नहीं हमारा एक बसेरा,
नाग वो तो फनी है मेरा।

कल की चित्र पहेली का उत्तर है नागफनी (cactus)

Sunday, June 29, 2008

चित्र पहेली– इस फूल को क्या नाम दें..

*****चित्र पहेली– इस फूल को क्या नाम दें..*****

अब इस फूल को किस नाम से जानते हैं आप!!! बताईये तो सही....

Friday, June 27, 2008

एस. बी. आई. मे क्लर्क राष्ट्रपिता


है ना आश्चर्य वाली बात .
पर है १६ आने सच . कैसे आप ख़ुद ही देख ले ....
ये है विशेष प्रस्ताव देश के अग्रणी बैंक का राष्ट्रपिता के लिए...
फोटो आभार - नवभारत टाईम्स

Tuesday, June 24, 2008

चित्र पहेली का– फल (उत्तर)

***** चित्र पहेली का– फल (उत्तर) *****

कल की चित्र पहेली में जागरूक पाठकों ने बुद्धिकौशल का परिचय देते हुए विभिन्न नाम से पहेली को बताया। लीची, गुलाब जामुन, चेरी, आलूबुखारा...यहाँ तक कि डायनासोर के अण्डे भी....

पर पहली बाज़ी मारी अभिषेक आन्नद ने. बहुत उधेड़बुन के बाद समीर जी ने भी सही निशाने पर तीर लगाया वो भी इसके बैज्ञानिक नाम के साथ...
आप सभी को बधाई......

इस पहेली का सही उत्तर काफल है जिसका बैज्ञानिक नाम Myrica Esculenta है. काफल गहरे लाल रंग का फल होता है जो मार्च-अप्रेल के महिने में पकता है. इसे नमक-तेल लगाकर खाने का अपना ही मज़ा है.

काफल के बारे में उत्तराखंड के लोक कवि गुमानी ने अपनी कविता में कुछ इस तरह कहा है -

खाणा लायक इन्द्र का , हम छियाँ भूलोक आई पड़ाँ।
पृथ्वी में लग यो पहाड़ हमारी थाती रचा दैव लै॥
योई चित्त विचारी काफल सबै राता भया क्रोध लै।
कोई बुड़ा ख़ुड़ा शरम लै काला धुमैला भया॥

काफल से जुड़ी एक लोक कथा जो मैने सुनी है कुछ इस तरह है. ...

एक पहाडी के समीप वाले गाँव में एक औरत अपने बेटे के साथ रहती थी. उनके पास धन की कमी होने के कारण वह जंगल के फल खाकर ही अपना जीवन निर्वाह करते थे. वह औरत बडा ही कठिन परिश्रम करती थी, लेकिन किसी पर भी यकीन नही करती थी. एक दिन वह जंगल से रसीले काफल के फल तोडकर लाई. उन काफलों को जंगली पक्षियों से बचाने के लिये अपने बेटे से उन काफलों से भरी टोकरी की देखभाल करने के लिये कहा और खुद खेतों में काम करने चली गयी. रसीले काफल देखकर बच्चे का मन काफल खाने को ललचाया, लेकिन अपनी माँ के डर से उसने एक भी दाना नहीं खाया.

वह औरत जब शाम को खेतों से थकी हुई घर पहुँची तो काफल धूप से थोडा सूख गये थे, जिससे उनकी मात्रा कम लग रही थी. यह देख कर औरत को गुस्सा आ गया, उसको लगा कि बच्चे ने टोकरी में से कुछ काफल खा लिये हैं. उसने गुस्से में एक बडा पत्थर बेटे की तरफ फेंका जो बच्चे के सिर पर लगा और बच्चा वहीं मर गया. वो फल बाहर ही पडे रहे, औरत दूसरे दिन फिर जंगल गयी. जब वह वापस आयी तो काफल बारिश में भीग कर फूल गये थे, और टोकरी भरी हुयी दिखने लगी. तब उस औरत को अपनी गलती का अहसास हुआ. अपनी नासमझी के कारण उसने अपना प्यारा सा बेटा मार दिया था.

कहते हैं कि वह बच्चा “घुघुती” पक्षी बन कर अमर हो गया. इन घुघुती पक्षियों के झुण्ड अब भी गाँव के पास ये आवाज लगाते हुये सुने जाते
"काफल पाको, मैंल नि चाख्यो"(काफल पके, पर मैंने नहीं चखे)



बेडु पाको बारो मासा की धुन तो सुनी ही होगी आपने आमिर खान के कोकाकोला वाले बिज्ञापन में. साथ ही राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म विवाह में गाने की पहली लाईन में इसी धुन का प्रयोग किया गया है. जो उत्तराखंड के गायक गोपाल बाबू गोस्वामी द्वारा गाये इसी गाने की चर्चित धुन है.

ये लोकगीत कुछ इस तरह है....

बेडु पाको बारो मासा, ओ नरण काफल पाको चैता मेरी छैला
बेडु पाको बारो मासा, ओ नरण काफल पाको चैता मेरी छैला - २
भुण भुण दिन आयो -२ नरण बुझ तेरी मैता मेरी छैला -२
बेडु पाको बारो मासा -२, ओ नरण काफल पाको चैत मेरी छैला - २

आप खांछे पान सुपारी -२, नरण मैं भी लूँ छ बीड़ी मेरी छैला -२
बेडु पाको बारो मासा -२, ओ नरण काफल पाको चैता मेरी छैला - २

अल्मोड़ा की नंदा देवी, नरण फुल छदुनी पात मेरी छैला
बेडु पाको बारो मासा -२, ओ नरण काफल पाको चैता मेरी छैला - २

Monday, June 23, 2008

चित्र पहेली-- क्या है ये.

*****चित्र पहेली-- क्या है ये. *****

जरा अपना बुद्धिकौशल तो दिखाईये...

Sunday, June 22, 2008

कौन रोकता है तुम्हें--कविता

*****कौन रोकता है तुम्हें*****

कौन रोकता है तुम्हें
आसमॉ छूने के लिए
पर ज़िद ना करो पत्थर मारने की
वापस तुम पर ही गिरेगा, याद रखना

कौन रोकता है तुम्हें
मन्दिर जाने के लिए
पर ज़िद ना करो आग से खेलने की
जल जाओगे, याद रखना

कौन रोकता है तुम्हें
कन्दुक-क्रीड़ा के लिए
पर ज़िद ना करो सचिन,धोनी बनने की
शीशे भी टूटेंगे आपने ही, याद रखना

कौन रोकता है तुम्हें
चाकू-बन्दूक खेलने के लिए
पर ज़िद ना करो इसे आजीविका बनाने की
लादेन, वीरप्पन तुम नहीं, याद रखना.

Wednesday, June 18, 2008

जिन्दगी को खींचती जिन्दगी

*****जिन्दगी को खींचती जिन्दगी *****

समय से पहले मानसून आने से सभी खुश हैं. दिल्ली का 108 साल का रिकॉर्ड टूटा है तो वही सूखे की मार झेल रहे बुन्देलखण्ड के लोग खुशी मना रहे हैं.

दूसरी ओर देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में नगर पालिका की पोल खुल गई है. बारिश के कारण जहाँ दिल्ली में एक दम्पत्ति खुले गटर के मेन होल में चला जाता है वहीं मुंबई में सदी के महानायक अपनी कारों को बचाने के लिए एक होटल के गैराज़ की शरण लेते है.



वही दूसरी ओर देश का गरीब वहीं का वहीं है. जिसका कुछ नज़ारा इस तस्वीर में साफ नज़र आता है. जहाँ जिन्दगी जीने के लिए जिन्दगी को जिन्दगी खीच रही है।


फोटो आभार- हिन्दुस्तान टाइम्स

Sunday, June 15, 2008

अब लालू भी कूदे

*****अब लालू भी कूदे *****

ये चीज़ ही ऐसी है। सब कूद रहे हैं धीरे-धीरे। आमिर, अमिताभ, जॉन ......... सब वी. आई. पी. ...


अब रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव भी आ गये हैं अपना झन्डा लेकर. कभी आई टी को सन्देह की नज़रों से देख 'ये आई टी वाई टी क्या होता है' कहने वाले लालू ने भी अपना ब्लोग शुरु कर दिया है। रेल मंत्री अपने को आज उसी तकनीक के सहारे अभिव्यक्त कर रहे हैं. आई. आई. एम. में व्याख्यान देने और ओक्सफोर्ड विश्वविध्यालय के विद्यार्थियों को ज्ञान देने वाले लालू अब ब्लोग जगत में भी हलचल मचाने आ गये है.

Tuesday, June 10, 2008

आदमी और चिम्पांजी

*****आदमी और चिम्पांजी *****

आदमी और चिम्पांजी मे बहुत सी समानता हैं। बैज्ञानिक कह भी चुके हैं और सिद्ध भी कर चुके हैं। आज हम भी कहते हैं अपने अंदाज मे। आप भी देखिये ।