Sunday, November 25, 2007

कुछ कहती जिन्दगी

जिन्दगी इससे कहीं भारी है....

जिंन्दगी की परीक्षा...



पापी पेट के लिए.....


जीने के लिए……

मुसीबत में जो साथ दे वही दोस्त……….


मुझे पढना है...


चलना ही जिन्दगी है...


यहाँ कुछ ऐसी ही परिवहन व्यवस्था है...


जीने के लिए सब करना पड़ता है...


Saturday, November 24, 2007

अमिताभ बच्चन का वेतन मात्र रू. 2500 है!!!


नाम- अमिताभ बच्चन
व्यवसाय- एक्टिंग

आमदनी- करोड़ों में

वेतन- रू. 2500 मात्र







अरे ये कोई मजाक नहीं हो रहा है. अमिताभ बच्चन को ये वेतन रू. 2500 सालाना के हिसाब से मिलता है. न कि घंटों, दिनों या महिनों के हिसाब से.

भले ही अमिताभ बच्चन फिल्मों और विज्ञापनों के जरिये करोड़ों कमा रहे हों, लेकिन एनर्जी डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (ई.डी.सी.एल.) के निदेशक के तौर पर उन्हें सालाना सिर्फ रू. 2500 का वेतन मिला. मजे की बात यह है कि उसी कंपनी से समाजवादी पार्टी के नेता अमरसिंह को साल 2006-07 के लिए रू. 32.10 लाख रूपए का चेक मिला.

अब आपको ये भी बताये देते हैं कि दोनों में फर्क केवल इतना सा है कि अमरसिंह इस बीएसई में सूचीबद्ध कंपनी के प्रवर्तक और अध्यक्ष हैं, जबकि बच्चन गैर कार्यकारी निदेशक हैं. अमिताभ बच्चन के पास कंपनी के रू. 18 करोड़ रूपए के शेयर हैं, जबकि अमरसिंह और उनकी पत्नी के पास मात्र रू. 9 करोड़ रूपए के शेयर हैं.

कंपनी की प्रर्वतकों में से एक अमरसिंह की पत्नी पंकजा कुमारीसिंह को उस कंपनी में निदेशक के तौर पर रू. 10000 मिले. ई.डी.सी.एल. एक बिजली उत्पादन कंपनी है, जिसका पंजीकृत दफ्तर कोडागु कर्नाटक में है. ई.डी.सी.एल. ने एन.एस.ई. में अपने शेयर पिछले शुक्रवार को सूचीबद्ध किए जबकि बी.एस.ई. कोलकाता और बंगलोर स्टाक एक्सचेंज में कंपनी पहले से सूचीबद्ध है.

Friday, November 23, 2007

कुछ महत्वपूर्ण नियम (Some Important Laws)

कुछ महत्वपूर्ण नियम Some Important Laws

LAW OF QUEUE:
If you change queues, the one you have left will start to move faster than the one you are in now.

LAW OF TELEPHONE :
When you dial a wrong number, you never get an engaged one.

LAW OF MECHANICAL REPAIR :
After your hands become coated with grease, your nose will begin to itch.

LAW OF THE WORKSHOP : Any tool, when dropped, will roll to the least accessible corner.

LAW OF THE ALIBI:
If you tell the boss you were late for work because you had a flat tire, the next morning you will have a flat tire.

BATH THEOREM: When the body is immersed in water, the telephone rings.

LAW OF ENCOUNTERS: The probability of meeting someone you know increases when you are with someone you don't want to be seen with.

LAW OF THE RESULT: When you try to prove to someone that a machine won't work, it will!

LAW OF BIOMECHANICS : The severity of the itch is inversely proportional to the reach.

THEATRE RULE: People with the seats at the furthest from the aisle arrive last.

LAW OF COFFEE: As soon as you sit down for a cup of hot coffee, your boss will ask you to do something which will last until the coffee is cold.

Tuesday, November 20, 2007

बी.सी.सी.आई. की मोनोपोली

आईसीएल के क्रिकेट में अवतरण से बौखलाई बी.सी.सी.आई. ने धीरे- धीरे अपने खिलाड़ियों और अधिकारियों पर प्रतिबन्ध लगाने शुरू कर दिये थे. ये बात तो आपको पता ही है. अभी कल ही खबर थी कि खिलाड़ियों ने क्रिकेट चयनकर्ताओं और अधिकारियों के ड्रेसिंग रूम में आने पर आपत्ति जताई थी जिसे चयनकर्ता और अधिकारीगण अपना अधिकार समझते थे. इसे मुख्य चयनकर्ता दिलीप वेंगसरकर ने सही बताया था. बी.सी.सी.आई. ने भी खिलाड़ियों के मीडिया से बात करने पर प्रतिबन्ध लगा दिया. बी.सी.सी.आई. के साथ सीधी पंगा मोल लेने के बाद मुख्य चयनकर्ता दिलीप वेंगसरकर ने क्रिकेट बोर्ड के निर्देशानुसार कॉलम लिखना बंद कर दिया है और इसकी शुरुआत उन्होंने शरद पवार से जुड़े एक मराठी दैनिक अखबार से ही की है.

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के प्रमुख शरद पवार के भाई के समाचार पत्र सकाल से जुड़े लोगों के अनुसार वेंगसरकर ने अखबार के लिए अपना कॉलम कवर ड्राइव लिखना बंद कर दिया है. यह कॉलम वन डे मैच के प्रीव्यू के तौर पर लिखा जा रहा था. उनका आखिरी कॉलम तयशुदा कार्यक्रम के तहत भारत-पाक के बीच अंतिम वन डे मैच से पहले मिल गया था लेकिन वह प्रकाशित नहीं हुआ.
जैसा कि मैंने बताया इससे पहले बी.सी.सी.आई. ने वेंगसरकर और चार अन्य चयनकर्ताओं को कॉलम लिखने और मीडिया से बात करने के लिए प्रतिबंधित किया था लेकिन वेंगसरकर ने बोर्ड के आदेश को न मानते हुए कॉलम लिखना जारी रखा था. इस मामले को बोर्ड सचिव निरंजन शाह ने गंभीरता से लिया और वेंगसरकर से आदेश की अवहेलना पर जवाब मांगा. बोर्ड द्वारा सात सूत्रीय दिशा निर्देश भेजने पर पिछले 15 सालों से कॉलम लिख रहे वेंगसरकर इस फरमान से खासे नाराज हैं.

बी.सी.सी.आई. फिल्मी कलाकार शाहरूख खान से भी खासी नाराज है आजकल. क्योंकि मुम्बई मैच के बाद शाहरूख खान जयपुर में भी नजर आये थे. वहाँ सिने अभिनेता अपनी फिल्म का प्रचार करते पाये गये. पता नहीं बीसीसीआई अब किस-किस पर प्रतिबन्ध लगायेगी ?

Monday, November 19, 2007

स्वस्ति श्री तुलसी कुलभूषण दूषन हरन गोसाई--मीराबाई

मीराबाई को कौन नहीं जानता. बचपन में ना जाने कितनी बार पढ़ा है. कृष्णभक्ति से ओत-प्रोत एक भक्तिन थी. मीराबाई का कृष्णभक्ति में नाचना और गाना राज परिवार को अच्छा नहीं लगता था. उन्होंने कई बार मीराबाई को विष देकर मारने की कोशिश की. घर वालों के इस प्रकार के व्यवहार से परेशान होकर वह द्वारका और वृंदावन गईं. वह जहाँ जाती थीं, वहाँ लोगों का सम्मान मिलता था. लोग मीराबाई को देवियों के जैसा प्यार और सम्मान देते थे. इसी दौरान अपने घर-परिवार से दुखी होकर उन्होंने राममार्गी तुलसीदास को पत्र लिखा --

स्वस्ति श्री तुलसी कुलभूषण दूषन- हरन गोसाई।
बारहिं बार प्रनाम करहूँ अब हरहूँ सोक- समुदाई।।
घर के स्वजन हमारे जेते सबन्ह उपाधि बढ़ाई।
साधु- सग अरु भजन करत माहिं देत कलेस महाई।।
मेरे माता- पिता के समहौ, हरिभक्तन्ह सुखदाई।
हमको कहा उचित करिबो है, सो लिखिए समझाई।।

मीराबाई के पत्र का जवाब तुलसी दास ने इस प्रकार दिया--

जाके प्रिय न राम बैदेही।
सो नर तजिए कोटि बैरी सम जद्यपि परम सनेहा।।
नाते सबै राम के मनियत सुह्मद सुसंख्य जहाँ लौ।
अंजन कहा आँखि जो फूटे, बहुतक कहो कहां लौ।।

Saturday, November 17, 2007

शादीशुदा पुरुष सिंदूर क्यों नहीं लगाते ?

अभी कल ही की बात है मैं छठ पूजा में गया था. पूजा में कुछ पुरुषों के कुछ इस तरह से टीका लगा हुआ था जैसे महिलाओं ने सिंदूर लगाया था. महिलाओं और पुरुषों के चेहरे समान नज़र आ रहे थे. सभी छठ पूजा का आन्नद उठा रहे थे. तभी मैंने एक मासूम बच्ची को सुना जो (शायद इस पर्व से परिचित नहीं थी) अपनी माँ से पूछ रही थी ‘माँ क्या शादीशुदा पुरुष भी सिंदूर लगाते हैं ?’ महिला बोली ‘मर्द सिंदूर नहीं लगाते’. कुछ देर बाद दोनों माँ-बेटी भीड़ में कहीं खो गये. मासूम का सवाल मुझे कुछ गंभीर सा लगा.
आज जब लंच में यह बात अपने मित्रों को बताई तो शर्मा जी अपनी उजड़ी जवानी के तारों झेड़ते हुए बोले- ‘मर्द सिंदूर नहीं लगा सकते क्योंकि फिर हम गंजे क्या करेंगे’. तभी हमेशा शांत रहने वाली शांति मैडम बोली –‘ अगर मर्द सिंदूर लगाएंगे तो मुश्किल हो जाएगी क्योंकि तब वे ऑफिस की कुआंरी लड़कियों को झांसा नहीं दे पाएंगे’.

पीछे हमारी बातें सुन रहे कैंटीन वाले गोपाल बाबू बोले- ‘आदमियों को सिंदूर या और किसी सिंबल की ज़रूरत ही क्या है ? उनका लुटा-पिटा और परेशान चेहरा ही बता देता है कि वे शादीशुदा हैं.’ 75 सावन देख चुके इस जवान से यह सुनकर माहौल ठहाकों से भर गया.

इस बारे में आप क्या कहते हैं