Monday, October 29, 2007

आज उल्लू की विशेष पूजा है..............


29 अक्टूबर 2007, एक खास दिन भारतीयों के लिए. विशेषकर भारतीय नारियों के लिए. आप तो समझ ही गये ना कि मैं ऐसा क्यूँ कह रहा हूँ. आज है ना वह विशेष पर्व (दिन) जिसका हर भारतीय नारी (शादीशुदा) को बड़ी उत्सुकता से इंतजार रहता है.जी हाँ सही समझे करवाचौथ. आज के दिन भारतीय नारी बिना खाये पिये, भूखे प्यासे रहकर अपने पति की लम्बी उम्र के लिए उपवास रखती है. इसके पीछे कई किंवदंतियां प्रचलित हैं. पर ये कुछ खास है.

एक समय की बात है .......
लक्ष्मी जी दिपावली के दिन पृथ्वीलोक में अपने भक्तों के घर आशीर्वाद देने जा रही थी. इधर से उधर , एक भक्त के घर से दूसरे भक्त के घर, फिर तीसरे फिर चौथे.... बारी-बारी सभी भक्तों के घर जा रही थी. सभी भक्त बड़े तन, मन और धन से लक्ष्मी जी की पूजा कर रहे थे. लक्ष्मी जी पर आरती आरतीयां गाई जा रही थी. लक्ष्मी जी खुश होकर आशीर्वाद दे रही थी.

बाहर बैठा लक्ष्मी जी का वाहन उल्लू यह सब देख रहा था. उल्लू को बहुत दुख हुआ. उसने सोचा कि वह लक्ष्मी जी का वाहन है फिर भी कोई उसे पूछता नहीं है उल्टा दुत्कारते ही है. लक्ष्मी जी का वाहन ‘उल्लू’ रूठ गया और बोला “आपकी सब पूजा करते हैं , मुझे कोई नहीं पूछता”. लक्ष्मी जी बात समझ गई . लक्ष्मी जी हल्का स मुस्कराई और बोली “ अब से हर साल मेरी पूजा से 11 दिन पहले तुम्हारी पूजा होगी”. उस दिन सिर्फ उल्लू पूजे जायेंगे.

तब से दिवाली के 11 दिन पहले ‘कड़वा चौथ’ कहकर उल्लू दिवस मनाया जाता है.
आज के जमाने में उल्लू तो आसानी से मिलते नहीं है. पर फिर भी उल्लू दिवस बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है. हाँ उल्लू की जगह किसी और ने ले ली है. शायद आज के दौर में बैठा बिठाया उल्लू जब घर में ही हो तो कोई बाहर क्यूँ ढ़ूंडे.!!!

Saturday, October 27, 2007

इसे देखकर आप क्या कहेंगे??.


हुआंग यान नाम का यह 4 साल का चीनी (किंगडाओ) बच्चा बेखौफ बेलुगा ह्वेल पर सवारी कर रहा है। अक्सर ऐसे हैरत अंगेज कारनामों को देखकर अनायास ही निकल पड़ता है ये कोई बच्चों का खेल नहीं. पर इसे देखकर आप क्या कहेंगे??.

Thursday, October 25, 2007

न्याय के तराजू में- देर है अन्धेर नहीं


कोर्ट के 4 अलग-अलग फैसलों में कल 60 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई. दिल्ली के सीपी शूटाआउट (31 मार्च 1997) सभी आरोपी पुलिसवालों को उम्रकैद के साथ जुर्मना हुआ. मधुमिता हत्याकांड(9 मई 2003) में सपा नेता अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि को उम्रकैद की सजा हुई. कोयम्बटूर ब्लास्ट (14 फरवरी 1998) में 31 और कानपुर दंगों (1992 में बाबरी मस्जिद गिराये जाने के बाद) में 15 लोगों को आजीवन कारावास की सजा दी गयी. पिछले दिनों में कोर्ट से कुछ चर्चित चेहरों पर भी न्याय की मुहर लगाई. पेश हैं कुछ ऐसी ही तशवीरें..............












संजय दतअब गाँधीगिरी का सहारा





सलमान खानसबसे महंगा शिकार है चिंकारा,
तौबा मेरी तौबा




अमरमणि त्रिपाठीप्यार कोई बच्चों का खेल नहीं




एसीपी राठी फर्जी काम—ना बाबा ना




Monday, October 22, 2007

रावण का बड़ता कद


प्रत्येक वर्ष दशहरा के अवसर पर बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक स्वरूप रावण अहंकार एवं आतंक के प्रतीक का पुतला पूरे देश में जलाया जाता है. जैसे-जैसे देश में बुराई, आतंकवाद व साम्प्रदायिकता बढती जा रही है, वैसे-वैसे प्रत्येक वर्ष बुराई के प्रतीक रावण की ऊंचाई भी बड़ती जाती है. रावण और उसके परिवार के ऊँचाई हर साल बड़ती जाती है. पिछले साल सबसे ऊँचे रावण की ऊंचाई लगभग 95 फुट थी. परन्तु बीते एक साल में हुई आतंकी धटनाओं [पानीपत (समझौता एक्सप्रेस), हैदराबाद तथा अजमेर में हुए बम विस्फोट] से फिर यह जाहिर हुआ कि आतंकवाद अभी भी निरंतर बढता ही जा रहा है अतः इस साल रामलीला के आयोजकों ने रावण की ऊंचाई और भी बढा दी गई है। इस वर्ष बराडा (अजमेर) में तैयार होने वाला रावण देश का सबसे ऊंचा रावण का प्रतीक (पुतला) था. इस बार बराडा का यह रावण लगभग 110 फुट ऊँचा था.

हर साल बुराई के पतीक रावण का दहन किया जाता है. आयोजकों द्वारा रावण के कद ऊँचे से ऊँचे रखने की होड़ रहती है. शायद ये लोग यह भूल जाते हैं कि रावण को अच्छाई का नहीं बुराई का प्रतीक माना जाता है, अहंकार और अधर्म का प्रतीक मना जाता है. जिस प्रकार हर साल रावण के कद में बडोत्तरी हो रही है उसी तरह समाज में अनैतिकता, अधर्म, और आतंक में का कद बड़ते जा रहा है. अब रामायण और रामलीला केवल entertainment का साधन बन गई है. या कहें एक परम्परा है जिसे खोने से बचाने का और अपने को इतिहास से जुड़े का प्रयास है रामलीला . अब न रामयुग है न राम है और ना रावण. हाँ समाज में राम का तो नहीं रावण का प्रतिरूप ( आधुनिक भाषा में क्लोन ) देखने को मिल जाते है. मुँह में वचन राम के और कर्म रावण के होते हैं. हाँ राम के नाम पर राजनीति वाले बहुधा देखने को मिल जाते हैं.

Friday, October 19, 2007

चोरी मोबाइल का पता बताएगी वेबसाइट

लगभग 6 महिने पहले मेरा मोबाइल चोरी हो गया. बहुत खोजबीन के बाद भी जब मोबाइल नहीं मिला तो पोलिस स्टेशन रिपोर्ट लिखाने गया. वहाँ मुझसे आईएमईआई (IMEI) नम्बर मांगा गया जो मेरे पास नहीं था (वैसे में ऐसी स्थिति के लिए कभी तैयार नहीं था). इसलिए मात्र खानापूर्ति करते हुए मैं वापस आ गया. आमतौर पर चोरी गए मोबाइल का पता लगाना काफी मुश्किल काम होता है, लेकिन ठाणे, मुम्बई के दो युवकों ने एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जिसे मोबाइल में लोड करने पर यह पता लग सकेगा कि चुराया गया मोबाइल कहां है और उसमें कब नया सिम कार्ड डाला गया है.

इन युवकों ने एक वेबसाइट डब्लू डब्लू डब्लू डॉट सेलसेफइंडिया डॉट कॉम (www.cellsefeindia.com) बनाई है, जिसमें आप अपने मोबाइल का इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी (IMEI) नंबर और अन्य जानकारियां दर्ज करवाकर चोरी गए मोबाइल का पता लगा सकते हैं. ठाणे के सॉफ्टवेयर इंजीनियर अभय पारसनिस और निरंजन भोसले द्वारा बनाई गई यह वेबसाइट दुनिया भर में लोकप्रिय हो चुकी है.

आईएमईआई का महत्व हर मोबाइल पर अंकित आईएमईआई नंबर आमतौर पर लोगों को मालूम नहीं होता. मोबाइल के चोरी चले जाने पर लोग पुलिस को उसका आईएमईआई नंबर नहीं बता पाते, जिससे उसकी लोकेशन बता पाना संभव नहीं होता.

कैसे काम करती है वेबसाइट
चोरी गए मोबाइल को किसी दूसरे सिम कार्ड से चालू करते ही आईएमईआई नंबर की बदौलत वह बेवसाइट की पकड़ में आ जाता है. इसके लिए हैंडसेट में एक सॉफ्टवेयर लोड कराना होता है, साथ ही सेलफोन मालिक को वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन भी करवाना होता है. इसके लिए जेब हल्की करनी पड़ती है. इसकी तीन साल की रजिस्ट्रेशन फीस 300 रुपए आती है. हालांकि वेबसाइट की अभी आधिकारिक तौर पर लांचिंग नहीं हुई है, मगर पिछले 10 दिनों में 59275 से अधिक लोग इस पर विजिट कर चुके हैं.

Thursday, October 18, 2007

सागर से चार बाल्टी पानी कम!!!!!!!!!

पिछले कुछ दिनों से शेयर बाजार तीव्र गति से छलांग लगाते हुए चड़ रहा था. अचानक कल इसकी गति में विराम (Break) लगने के साथ ही ढ़लान नजर आया. जिससे कई बड़े निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ा. पिछले दिनों शेयर बाजार और रुपए की तेजी से जिनकी दौलत हर सप्ताह उछल रही थी, 13 दिनों में 1000 अंकों की गिरावट ने उन्हें अरबों का घाटा पहुंचाया है। पंद्रह दिन में ही मुकेश अंबानी सहित पांच प्रमुख अमीरों की दौलत में 400 अरब रुपए की कमी आई है। अनिल अंबानी तो खरबपतियों की सूची से बाहर हो गए हैं। शेयर बाजार में लगी कुल दौलत का दस फीसदी रखने वाले इन 5 अमीरों ने कुल नुकसान का बीस फीसदी उठाया। 26 जुलाई को उनकी संपत्ति 126.8 अरब डॉलर थी। यह घटकर 116.75 अरब डॉलर हो गई।

एक तरफ जहां बड़े निवेशकों के अरबों रुपए डूब गए, वहीं छोटे निवेशकों ने केवल 20000 करोड़ खोए हैं। कंपनियों के शेयरों में 2,10000 करोड़ का नुकसान हुआ और इसका आधा प्रवर्तकों ने झेला। शेयर बाजार में ताजा गिरावट (करेक्शन) का विश्लेषण करें तो अब बड़ी कंपनियों के शेयर पर दांव लगाना सुरक्षित नहीं रहा। सागर से चार बाल्टी पानी कम होने से क्या वो सूख जायेगा??

Monday, October 15, 2007

सरकारी तोहफा

इसे चुनावी दांव कहे या केन्द्र सरकार का केन्द्रीय कर्मचारियों को दिपावली का एडवांस तोहफा. छठॆ वॆतन आयोग ने केन्द्रीय कर्मचारियों के वेतनों में दो गुने से भी अधिक बढ़ोतरी का प्रस्ताव किया है.


वॆतन आयोग द्वारा प्रस्तावित वेतनमान कुछ इस तरह से हैं.
* सरकार में 37 वेतनमानों और ग्रेडों को घटाकर 16 कर दिया जाएगा.
* प्रस्ताव जनवरी, 2006 से प्रभावी होंगे. महंगाई भत्ता जनवरी,2007 से दिया जाएगा.
* चाहे किसी कर्मचारी ने नौकरी कभी ज्वॉइन की हो, लेकिन सभी को 31 दिसंबर को रिटायरमेंट दिया जाएगा.
* हर कर्मचारी को अपने मूल वेतन की 10 फीसदी राशि प्रोविडेंट फंड में जमा करानी होगी.
* आयोग ने हालांकि रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने की सिफारिश नहीं की है, लेकिन वरिष्ठ अफसर यह उम्र 60 से बढ़ाकर 62 करने के लिए लॉबिंग कर रहे हैं.
* आयोग ने सुझाव दिया है कि ए-1श्रेणी के शहर में आवास किराया भत्ता (एचआरए) मूल वेतन का 30 फीसदी (अधिकतम 12,000) होना चाहिए.
* ए और बी-1 श्रेणी के शहरों में आवास किराया भत्ता मूल वेतन का 15 फीसदी (अधिकतम 8,000 रुपए) होना चाहिए.
* रिटायर होने वाले कर्मचारियों की पेंशन आखिरी वेतन का 50 फीसदी (अधिकतम 40,000) होगी.
* पारिवारिक पेंशन आखिरी वेतन की 30 फीसदी (अधिकतम 24,000) होगी.

यदि आप केन्द्रीय कर्मचारी हैं तो ये आपके लिए यह दिपावली का सबसे बड़िया प्रस्तावित तोहफा हो सकता है.

Saturday, October 13, 2007

अनूठा मेल- नवरात्रि-ईद

नवरात्रि में इस बार ईद सेंवइयों की मिठास घोलेगी . 32 वर्ष बाद ईद और नवरात्रि एक साथ आ रही हैं जिससे पर्व का उल्लास और बढ़ गया है. आज चांद दिखने के बाद मुस्लिम समाज कल यानि रविवार को मीठी ईद मनाएगा .
शुक्रवार से नवरात्रि की शुरुआत हो गई है. 32 साल पहले 1975 में 6-13 अक्टूबर की शारदीय नवरात्रि थी, इस दौरान 10 अक्टूबर को ईद आई थी . नवरात्रि के दौरान ईद का संयोग आने से हिंदू-मुस्लिम समाज के लोगों में खासा उत्साह रहता है. समाज में भाईचारे की अनूठी मिसाल देखने को मिलती है. नवरात्रि के दौरान ईद आना प्रकृति का आना प्रेम का संदेश है कि सभी आपस में मिलजुल कर रहें.
1974-75 में नवरात्रि-ईद आसपास आयी थी. 1974 में 16-24 अक्टूबर की शारदीय नवरात्रि थी, इसी दौरान ईद आई थी, इसके बाद 1975 में फिर से नवरात्रि-ईद साथ-साथ आयी थी. ईद में हर वर्ष 10-12 दिन घटते हैं. हर वर्ष ईद के दिनों में कमी होती है, इस वर्ष ईद आने के बाद जब अगले वर्ष ईद आएगी, उसमें 10-12 दिन कम हो जाएंगे.
नवरात्रि-ईद का साथ-साथ आना एक संयोग है. इससे बदलते समाज को एकसूत्र में पिरोने में सहयोग मिलता है. और भाईचारा बड़ता है. लेकिन रजनितिक दल इसे अपनी राजनीति में खलल मानते हैं तभी तो गुजरात में नरेन्द्र मोदी सरकार समाज के दो बड़े स्तम्भों को अलग-अलग बाटने की कोशिश करती रहती है. इसका सबसे बड़ा और ताजा उदाहरण मुस्लिम क्षेत्रों की सड़कों में लगे नाम पट्टियों (जिन पर शहर, इलाके, सड़कों आदि का नाम होता है) पर हरा रंग चड़ा दिया और इसे नवीनीकरण का नाम दिया गया. क्या धर्म और जाति के नाम पर राजनीति से देश को विकसित देश बनाया जा सकता है????

कंप्यूटर पढ़ेगा दिमाग, बताएगा लें आराम

टफ्ट्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता तीन साल के एक शोध प्रोजेक्ट के तहत ऐसे कंप्यूटर एप्लीकेशन्स तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं, जिनमें कंप्यूटर किसी भी व्यक्ति की दिमागी प्रतिक्रियाओं के मुताबिक व्यवहार करेंगे।

इस प्रोजेक्ट के तहत शोधकर्ता व्यक्ति के माथे पर एक बैंड लगाएंगे, जिसमें से लाइट निकलेगी। यह लाइट व्यक्ति के मस्तिष्कीय ऊतकों में जाकर दिमागी प्रतिक्रियाओं की जानकारी देगी। इस जानकारी का विश्लेषण करके कंप्यूटर स्क्रीन ले आउट ठीक करेगा।

प्रोजेक्ट के तहत लाइट का इस्तेमाल दिमाग में खून के बहाव का आंकलन करेगा, जिसके बाद दिमाग के ओवरलोड होने, कुठा या ध्यान भंग होने जैसी चीजों का अध्ययन किया जाएगा। मैसाचुसेट्स में मौजूद एक यूनिवर्सिटी मेडफोर्ड के शोधकर्ता और कंप्यूटर साइंस प्रोफेसर रॉबर्ट जैकब के मुताबिक कंप्यूटर दिमाग की प्रतिक्रियाओं से आंकड़ों का विश्लेषण करके अपने इंटरफेस को एडजस्ट करेगा।

अगर आपका वर्कलोड बढ़ रहा है, तो आपके कंप्यूटर का स्क्रीन उसके मुताबिक ठीक हो जाएगा। अगर किसी एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को थकान हो रही हो, तो कंप्यूटर दूसरे कंट्रोलर के लिए सिफारिश कर सकेगा।

आभार- दैनिक भास्कर

Friday, October 12, 2007

नवरात्रि- महाशक्तियों का आगमन


आज से नवरात्र प्रारम्भ हो रहे हैं. नवरात्रि का त्योहार नौ दिनों तक चलता है। इन नौ दिनों में तीन देवियों पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ स्वरुपों की पूजा की जाती है। पहले तीन दिन पार्वती के तीन स्वरुपों (कुमार, पार्वती और काली), अगले तीन दिन लक्ष्मी माता के स्वरुपों और आखिरी के तीन दिन सरस्वती माता के स्वरुपों की पूजा करते है।

प्रथम दुर्गा : श्री शैलपुत्रीआदिशक्ति श्री दुर्गा का प्रथम रूप श्री शैलपुत्री हैं। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण ये शैलपुत्री कहलाती हैं। नवरात्र के प्रथम दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। इनके पूजन से मूलाधर चक्र जाग्रत होता है, जिससे साधक को मूलाधार चक्र जाग्रत होने से प्राप्त होने वाली सिद्धियां प्राप्त होती हैं।

द्वितीय दुर्गा : श्री ब्रह्मचारिणीआदिशक्ति श्री दुर्गा का द्वितीय रूप श्री ब्रह्मचारिणी हैं। यहां ब्रह्मचारिणी का तात्पर्य तपश्चारिणी है। इन्होंने भगवान शंकर को पति रूप से प्राप्त करने के लिए घोप तपस्या की थी। अतः ये तपश्चारिणी और ब्रह्मचारिणी के नाम से विख्यात हैं। नवरात्रि के द्वितीय दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है। इनकी उपासना से मनुष्य के तप, त्याग, वैराग्य सदाचार, संयम की वृद्धि होती है तथा मन कर्तव्य पथ से विचलित नहीं होता।

तृतीय दुर्गा : श्री चंद्रघंटाआदिशक्ति श्री दुर्गा का तृतीय रूप श्री चंद्रघंटा है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। नवरात्रि के तृतीय दिन इनका पूजन और अर्चना किया जाता है। इनके पूजन से साधक को मणिपुर चक्र के जाग्रत होने वाली सिद्धियां स्वतः प्राप्त हो जाती हैं तथा सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।

चतुर्थ दुर्गा : श्री कूष्मांडाआदिशक्ति श्री दुर्गा का चतुर्थ रूप श्री कूष्मांडा हैं। अपने उदर से अंड अर्थात् ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्मांडा देवी के नाम से पुकारा जाता है। नवरात्रि के चतुर्थ दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। श्री कूष्मांडा के पूजन से अनाहत चक्र जाग्रति की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। श्री कूष्मांडा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक नष्ट हो जाते हैं। इनकी भक्ति से आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है।

पंचम दुर्गा : श्री स्कंदमाताआदिशक्ति श्री दुर्गा का पंचम रूप श्री स्कंदमाता हैं। श्री स्कंद (कुमार कार्तिकेय) की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। नवरात्रि के पंचम दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। इनकी आराधना से विशुद्ध चक्र के जाग्रत होने वाली सिद्धियां स्वतः प्राप्त हो जाती हैं तथा मृत्युलोक में ही साधक को परम शांति और सुख का अनुभव होने लगता है। उसके लिए मोक्ष का द्वार स्वंयमेव सुलभ हो जाता है।

षष्ठम दुर्गा : श्री कात्यायनीआदिशक्ति श्री दुर्गा का षष्ठम् रूप श्री कात्यायनी। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इसलिए वे कात्यायनी कहलाती हैं। नवरात्रि के षष्ठम दिन इनकी पूजा और आराधना होती है। श्री कात्यायनी की उपासना से आज्ञा चक्र जाग्रति की सिद्धियां साधक को स्वयंमेव प्राप्त हो जाती है। वह इस लोक में स्थित रहकर भी अलौलिक तेज और प्रभाव से युक्त हो जाता है तथा उसके रोग, शोक, संताप, भय आदि सर्वथा विनष्ट हो जाते हैं।

सप्तम दुर्गा : श्री कालरात्रिआदिशक्ति श्रीदुर्गा का सप्तम रूप श्री कालरात्रि हैं। ये काल का नाश करने वाली हैं, इसलिए कालरात्रि कहलाती हैं। नवरात्रि के सप्तम दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है। इस दिन साधक को अपना चित्त भानु चक्र (मध्य ललाट) में स्थिर कर साधना करनी चाहिए। श्री कालरात्रि की साधना से साधक को भानुचक्र जाग्रति की सिद्धियां स्वयंमेव प्राप्त हो जाती हैं।

अष्टम दुर्गा : श्री महागौरीआदिशक्ति श्री दुर्गा का अष्टम रूप श्री महागौरी हैं। इनका वर्ण पूर्णतः गौर है, इसलिए ये महागौरी कहलाती हैं। नवरात्रि के अष्टम दिन इनका पूजन और अर्चन किया जाता है। इन दिन साधक को अपना चित्त सोमचक्र (उर्ध्व ललाट) में स्थिर करके साधना करनी चाहिए। श्री महागौरी की आराधना से सोम चक्र जाग्रति की सिद्धियों की प्राप्ति होती है। इनकी उपासना से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।

नवम् दुर्गा : श्री सिद्धिदात्रीआदिशक्ति श्री दुर्गा का नवम् रूप श्री सिद्धिदात्री हैं। ये सब प्रकार की सिद्धियों की दाता हैं, इसीलिए ये सिद्धिदात्री कहलाती हैं। नवरात्रि के नवम् दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। इस दिन साधक को अपना चित्त निर्वाण चक्र (मध्य कपाल) में स्थिर कर अपनी साधना करनी चाहिए। श्री सिद्धिदात्री की साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है।

Wednesday, October 10, 2007

गुरू दक्षिणा


भारत में गुरू-शिष्य परम्परा पुरातन समय से चली आ रही है. उस समय शिष्य गुरुकुल में जाकर शिक्षार्जन करते थे. और शिक्षा पूरी होने पर अपने गुरू को गुरू दक्षिणा देते थे. भारतीय इतिहास में गुरू-शिष्य का श्रेष्ठ उदाहरण आचार्य द्रोण और अर्जुन को मना जाता है जबकि गुरूदक्षिणा (जो शिक्षा समाप्त होने के बाद दी जाती थी) का नाम आते ही एकलव्य का नाम याद आता है जिसने गुरू दक्षिणा में अपना अंगूठा दे दिया था.पर ये अब केवल किस्से कहानियों में ही दिखाई देते हैं.


आज के दौर में गुरू-शिष्य परम्परा का व्यवसायिकरण हो गया है जहाँ गुरू दक्षिणा शिक्षा प्रारम्भ होने से पहले ही ले ली जाती है जो शिक्षार्थी की समर्थता पर नहीं वरन गुरू की लोकप्रियता पर निर्भर करता है. इस दौर में जहाँ गुरू-शिष्य के रिस्ते शीर्ण हो रहे हैं वहीं कुछ शिष्य जीते जी गुरू को तो कुछ नहीं देते हैं लेकिन बाद में गुरू को श्रदांजली नाम पर अपनी माया(वती)(मुख्यमंत्री,उत्तर प्रदेश) का प्रभाव दिखाते हुए जनता जनार्दन से अर्जित आय एवं सरकारी महकमे का भरपूर (दुर्)प्रयोग करते हुए सबसे बड़ी गुरू दक्षिणा देते है. जनता जनार्दन ना चाहते हुए भी मूकदर्शक बनी रहती है और यही गाती है ------


रहने को घर नहीं, सोने को बिस्तर नहीं।
अपना खुदा है रखवाला, अब तक उसी ने है पाला॥


Sunday, October 7, 2007

ब्लू लाइन बस या ब्लू लाइन (अब) बस

भारत में लाइन लगना या लगाना कोई नई बात नहीं है। सुबह-सुबह दूध लेने के लिए लाइन, सस्ते गल्ले की दुकान में राशन लेने के लिए लाइन, बिजली पानी के बिल जमा करने के लिए लाइन, हस्पताल में पर्ची के लिए लाइन फिर डॉक्टर के लिए लाइन, और भी ना जाने किस-किस के लिए लाइन!!!. और तो और कुछ चिट्ठाकार भी लाइन में हैं. शायद सरकार ने भी दिल्ली में लोगों की बड़ती लाइन को देखते हुए ब्लू लाइन बस को हरी झंडी दी होगी. पर आज यही ब्लू लाइन बस रेड लाइन बस में बदल चुकी है. सरकारी आकड़ों के अनुसार वर्ष 2007 में अब तक (आज की घटना को छोड़कर) 80 लोगों को अपनी जिन्दगी से हाथ धोना पड़ा.


आज दिन की सबसे बड़ी खबर दिल्ली में ब्लू लाईन बस ने पैदल यात्रियों को कुचला जहाँ 7 लोगों की दर्दनाक मौत घटनास्थल पर ही हो गयी तथा कई अन्य घायल अवस्था में एम्स में भर्ती हैं। जिस पर
अविनाश जी पहले ही विस्तार से बता चुके हैं. जिसे मैं दोहराना उचित नहीं समझता. पर क्या कारण है कि 99 प्रतिशत दुर्घटना ब्लू लाइन बस से ही होती हैं(या कहें हुई हैं). वैसे ब्लू लाइन बस का सरकारी बस सेवा से सीधा-सीधा कोई कम्पटीशन नहीं है. क्योंकि सरकारी कर्मचारी अपने सरकारीपन का सदुपयोग करते हैं.(भारत में ये आम बात है). पर कुछ सरकारी कर्मचारी ऐसा नहीं करते तो उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग गैर सरकारी व्यक्तियों (ब्लू लाइन बस) द्वारा किया जाता है. सरकारी कर्मचारी को देख लेने की बात की जाती है (इस तरह की घटना का मैं स्वयं साक्षी हूँ.)

इस तरह की दुर्घटना ब्लू लाइन बसों के आपसी कम्पटीशन और अधिकाधिक सवारियों को लेने के चक्कर के चक्कर में क्षमता से अधिक गति में बस चलाने का परिणाम है. अक्सर ये देखने में आता है कि एक रूट की ब्लू लाइन बस निर्धारित स्थान पर खड़ी रहती है पर जैसे ही उसी रूट की दूसरी ब्लू लाइन बस आती है तो पहले से खड़ी ब्लू लाइन बस को जैसे पंख लग जाते हैं जिसके परिणाम दिल्ली में हुई आज की जैसी दर्दनाक घटनायें होती हैं. नतीजा आम जनता भुगतती है और माननीय मुख्यमंत्री आम जनता को ही दोष देती है. दोस्तो मैं आपसे पूछता हूँ---

क्या इस तरह की घटनाओं को देखते हुए सरकार का हाथ पर हाथ रखे बयानबाजी करना उचित है???
क्या ब्लू लाइन बस का नाम रेड अलर्ट लाइन बस कर देना चहिए या ब्लू लाइन को ब्लैक लाइन (हटा देना) चाहिए??

Friday, October 5, 2007

पहचान बनाम पहचान

कल मैंने अपने चिट्ठे में पहचान(Identity) की तलाश में भटकते चिट्ठाकरों के बारे में लिखा था. जिस पर प्रतिक्रिया स्वरूप कुछ टिप्णियाँ आयी. यहाँ चिट्ठाकार masijeevi ने कुछ इस तरह कहा........



समीरजी शायद कन्‍फ्यूज हैं (या फिर मैं) या कहें कि एक और पहचान का घपला-


बंधु स्‍पष्‍ट करें कि आप- मिर्ची सेठ- बोले तो पंकज नरूला यानि नारद के मालिक ही हैं (मुझे लगता है कि नहीं)




समीरजी ने टिप्‍पणी शायद यही समझकर की है।




Udan Tashtari ने कहा…
तलाश अभी जारी है???



- अरे , जब मुखिया ऐसा कहेंगे तब तो बड़ा चिन्ता का विषय है। :)



हमें लगा कि आप तक खबर पहुँच गई मतलब हल निकला ही समझो.







बात समझ गया कि ये एक तरह के नाम होने के कारण इस तरह की प्रतिक्रिया आयी है जो स्वभाविक है!! मुझे इस बात का आभास नहीं था कि नारद उवाच में मिर्ची के तड़के का भरपूर उपयोग चटकारे के साथ पहले से किया जा रहा है।



पहले से ही दो चिट्ठाकार इस पहचान (Identity) भ्रमजाल का शिकार हुए है. और अब मैं इसका शिकार नहीं होना चाहता. अतः मै अब नई पहचान नये नाम कामोद के नाम से आप लोगों के समक्ष उपस्थित हूँ.
अब शायद कोई
कन्‍फ्यूजन ना रहे.

पहचान ( IDENTITY)की तलाश

नीलिमा जी (मुझे कुछ कहना है) और नीलिमा जी (वाद सम्वाद) का चिट्ठा पढ़ा जहाँ दोनों चिट्ठाकार चिट्ठाजगत में अपनी पहचान तलाश रहे हैं. एक ऐसी तलाश जिसमें इनका कोई दोष नहीं है. ये कमाल तो हमारे नारद जी का है जो अपनी पुरानी आदतों ( इधर की बात उधर करने की) को नहीं छोड़ पाये हैं. नारद जी की गलती उसी तरह है जिस तरह बचपन में मास्साब द्वारा एक ही कक्षा में एक ही नाम के दो छात्र होने पर अक्सर बार बुलाया किसी को जाता था और चला कोई जाता था।

यहाँ नारद जी ने नीलिमा और नीलिमा सुखिजा अरोड़ा की तस्वीरों को ही आपस में बदल दिया. इसकी टोपी उसके सर पहना डाली. नारद जी तो अपना काम कर गये पर अब ये दोनों चिट्ठाकार (नीलिमा और नीलिमा सुखिजा अरोड़ा) चिट्ठाजगत में अपनी पहचान की तलाश कर रहीं हैं. तलाश अभी भी जारी है

Thursday, October 4, 2007

2 ओक्टोबर और गाँधी जी के बन्दर

बात कल 2 ओक्टोबर की है जब मैं अपने मित्र शर्मा जी के साथ शाम को सैर करने निकला था. हम लोग पार्क में बैठ गाँधी जी के उसूलों(गाँधीवाद) और उस पर फिल्मी दुनियाँ के पड़ते प्रभाव (गाँधीगिरी) पर चर्चा कर रहे थे. शर्मा जी बोले “यार मानो या ना मानो पर मुन्ना भाई ने गाँधीवाद को नया जन्म दिया है....(अपने शर्मा जी संजू बाबा के बहुत बडे प्रसंसक हैं )” . हमने उनकी तरफ पान बडाया. शर्मा जी गिलोटी मुँह में लेकर अपनी बात जारी रखे “...गाँधी जी के उसूलों को आज की युवा पीढ़ी भूलने लगी थी. पर मुन्ना ने इसे नया जन्म दिया है.” हम बात को आगे बड़ाते हुए बोले “ पर शर्मा जी ये बातें फिल्मी दुनियां तक ही अछ्छी लगती हैं असल जिन्दगी में नहीं....” हमारी बात काटते हुए शर्मा जी ने कई घटनाएं सुना दी जो गाँधीगिरी से प्रभावित थी (गाँधीवाद से नहीं). अब तो कुछ-कुछ मैं भी इस बात की सहमती दे रहा था.
अभी हमारी ये चर्चा जारी ही ठी कि पार्क के बाहर बचाओ-बचाओ की आवज सुनाई दी. हम तेजी से वहाँ पहुंचे जहाँ अब भीड़ ने अपना स्थान ले लिया था. देखा कुछ लोग एक व्यक्ति को लात-घूसों से मार रहे थे. भीड तमाशबीन बनी थी. मैंने और शर्मा जी ने उस व्यक्ति को बचाने का प्रयास किया तो कुछ लोग हमसे ही भिड़ने लगे. एक बोला “ चाचा जाओ. इन लफडों में ना ही पड़ो तो अछ्छा है. साला चार महिने से बैंक की किस्त नहीं दे रहा था. वार्निंग भी दी थी साले को तब भी किस्त नहीं दी. हम भी क्या करें बैंक का इतना प्रेशर रहता है ना....” अब समझ में आया कि ये लोग रिकवरी एजेंट हैं और मार खाने वाला बेचारा कर्जदार, जो मार खाते-खाते अर्ध-मूर्छित हो चुका था . उसने अपने साथी से कहा “ अरे कल्लू छोड़ दे इसे आज के लिए इतना ही बहुत है... अगर मर गया तो पैसा कौन देगा....” सभी एक वैन में चले गये.
इसी बीच पी. सी. आर. (पुलिसिया गाड़ी) आ गयी (फिल्मों की तरह वारदात होने के बाद) . भीड़ यथावत वहीं खड़ी थी. पुलिस लोगों से बयान देने के लिए कहा तो लोग यही कह रहे थे कि वो तो अभी-अभी आये उन्होंने कुछ देखा नहीं. एक सज्जन बोले ‘ मैने सुना कि यहां किसी को पीटा जा रहा है इसलिए चला आया.’ और जब हमारे शर्मा जी से पूछा गया तो वह पान मुँह में रखकर कुछ इस तरह बोले जैसे कि वो गूंगे हो. हमने पुलिस के सामने आँखों देखा हाल प्रसारित कर दिया.
यह सब देखकर लगा कि मुन्नाभाई ने गाँधीगिरी तो सिखा दी पर
गाँधी जी के तीन बन्दर आज भी ना बुरा देखते हैं, ना सुनते हैं और ना ही कुछ बोलते है.
क्या ये बन्दर कभी बदलेंगे??

Tuesday, October 2, 2007

और भारत हार गया.

आज भारत और ऑस्ट्रेलिया का क्रिकेट मैच था. बड़ी उत्सुकता थी कि धोनी के धुरंधरों का कमाल और भारतीय क्रिकेट के त्रिमूर्तियों (सचिन, सौरभ और द्रविड़) का अनुभव का कमाल रंग लायेगा. इसी भरोसे के साथ शर्मा जी,वर्मा जी और उनकी मंडली, कुल मिलाकर आधा दर्जन लोग, सभी सुबह- सुबह मेरे घर आ धमके. चलो अब आ ही गये तो भगा तो नहीं सकते. मन ही मन गुस्सा आ रहा था कि आज छुट्टी के दिन जरा आराम किया जायेगा और चुन्नू, मुन्नू और उनकी अम्मा की साथ समय बिताया जायेगा. पर दिखावटी हँसी के साथ उनका स्वागत किया.
हमने धर्मपत्नी से कहा कुछ चाय वगेरा बना दो. इसी बीच मैच शुरू हो गया. शर्मा जी धोनी ब्रिगेट की तारीफ करते नहीं थक रहे थे. पर उनका अंधक्रिकेट भक्ति हमें अछ्छी पसन्द नहीं आयी. हम कबाब में हड्डी बनते हुए बोल ही पड़े “ शर्मा जी बुरा ना माने पर धोनी ब्रिगेट की असली परीक्षा तो आज है. पिछली बार तो बारिश ने इज्जत बचा ली आज देखें क्या होता है.” शर्मा जी ने आँखें चड़ा कर हमें देखा और मैच देखने में मशगूल हो गये. मैच देखने से ज्यादा हम शर्मा जी की कामेंट्री सुन रहे थे. पहली पारी समाप्त होने तक ऑस्ट्रेलिया 307 का विशाल लक्ष्य भारत को दिया.
शर्मा जी की आवाज कुछ नरम पड़ने लगी. इसी बीच धर्मपत्नी चाय पकोड़े ली आयी. भारतीय पारी शुरू होने वाली थी. शर्मा जी बोले ‘आज का मैच तो देखने लायक होगा. कडा मुकाबला है. हम चुप रहे . उसका कारण ये था कि गौतम गंभीर (7) अगये अभी-अभी पेवेलियन गये थे. शर्मा जी की आवाज कुछ और नरम हुई पेर जोश वैसा ही था. नौवें ओवर में सचिन(16) भी चलते बने. पर हमारी उम्मीद कायम थी कि भारत जीत जायेगा. जल्द ही युवराज सिंह और उनके पीछे-पीछे उथप्पा भी चलते बने. अभी स्कोर मात्र 87 पर 4 था. इसी बीच वर्मा जी की पत्नी का फोन आ गया. वो हम सबसे विदा लेते हुए चरन जी को अपने साथ ये कहते हुए ले गये कि भारत की स्थिति तु चल में आता हूं जैसी है. मजाक में शर्मा जी बोले ‘ आप चलिये में आता हूं’
माहौल अब हँसी मज़ाक में बदल चुका था. पर जल्दी ही शर्मा जी की हँसी पर विराम छा गया क्योंकि द्रविड, पठान और भज्जी चलते बने. स्थिति गंभीर थी भारत की भी और शर्मा जी की भी. अब पवार को पिच में जमता देख हमारे शर्मा जी भी जम गये जो थोडी देर पहले तक जाने की बात कर रहे थे. 35 वें ओवर में पवार और 40 वें ओवर में ज़हीर खान को जाता देख अब शर्मा जी भी जाने की बात कहने लगे. हमने कहा ‘ धोनी तो अभी धो रहा है कुछ देर और रूक जाओ. पर शर्मा जी अब जाने लगे. वैसे भी उनकी मंडली धीरे-धीरे जा चुकी थी. हम भी चल दिये शर्मा जी को गेट तक छोड़ने. शर्मा निराश भाव से बार-बार कहाँ रहे थे कि भारत अब नहीं जीतेगा. सब जानते हुए भी मैंने आश्वस्त करते हुए कहा ‘ अरे अभी तो धोनी पिच पर है’
और अभी मैं शर्मा जी को छोड कमरे में पहुचा ही था कि धोनी के आउट होने की खबर सुनाई दी. और भारत (222) हार गया.

क्रिकेट और खेल जगत

बात कुछ दिनों पहले की है जब भारतीय क्रिकेट टीम 20-20 World Cup जीतकर अपने घर वापस आई. जहाँ भारतीय सरकार , क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड, और भारतीय जनता ने दिल खोलकर धोनी के धुरंधरों का स्वागत किया. भारतीय सरकार ने क्रिकेट के इन सितारों पर करोड़ों की बरसात की तो क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने अपना कुबेर का खज़ाना खोल दिया. वहीं राज्य सरकारों ने भी अपने राज्य के खिलाड़ियों को मालामाल किया. नौकरियों में समय से पहले तरक्की कर दी गयी. बाकी मीडिया जगत तो है ही.
ये तो हुआ खेल जगत के सिक्के का एक पहलू. अब देखिये दूसरा पहलू.
भारतीय हाँकी टीम भी World Cup जीतकर आयी थी पर पता ही नहीं चला कि ये World Cup जीतकर आये हैं. बात आई गई हो गई. राष्ट्रमंडल खेलों के खिलाड़ियों का भी कुछ ऐसा ही हाल है. चाहे वो स्वर्ण पदक ही क्यों ना लाये हों. पर ऐसा स्वागत और सम्मान नहीं होता.
भारतीय सरकार व क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड द्वारा धोनी के धुरंधरों का ऐसा अभूतपूर्व स्वागत देखकर सभी हतप्रभ रह गये.
1. क्या ये भारतीय सरकार का भारतीय खेल जगत के साथ दोगला व्यवहार सही है?
2. क्या हाँकी खिलाड़ियों तथा राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक विजेता द्वारा आत्मसम्मान के लिए आत्महत्या की धमकी देना सही है?
3. क्या शतरंज चैम्पियन विश्वनाथन आनन्द को अपने सम्मान के लिए याद दिलाना उचित है??
दोस्तो मैं आपसे पूछता हूं क्या ये अन्य खिलाड़ियों का हक नहीं है? अगर है तो इस खेल जगत में दोगले व्यवहार के लिए कौन जिम्मेदर है?